टोल घोटाला: एनएचएआई अधिकारियों, मध्यस्थों और एजेंसियों की मिलीभगत का आरोप, ईडी ने बरामद किए 1.03 करोड़ रुपये
लखनऊ। एनएचएआई टोल प्लाजा पर कथित टोल वसूली घोटाले के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में एक साथ तलाशी अभियान चलाकर 1.03 करोड़ रुपये की नकदी बरामद की है। इसके अलावा आठ बैंक लॉकर फ्रीज किए गए हैं। तलाशी के दौरान बड़ी संख्या में आपत्तिजनक दस्तावेज, लेखा पुस्तकें, वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक संबंधी कागजात और डिजिटल उपकरण भी जब्त किए गए हैं।
ईडी की जांच में एनएचएआई के कुछ अधिकारियों, उनके द्वारा नियुक्त मध्यस्थों और टोल संग्रह एजेंसियों के बीच कथित मिलीभगत की बात सामने आई है। आरोप है कि इस नेटवर्क के जरिए अनधिकृत सॉफ्टवेयर और मोबाइल एप्लीकेशन का इस्तेमाल कर टोल वसूली में हेराफेरी की गई और सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचाया गया।
मामले की शुरुआत मीरजापुर के लालगंज थाने में 22 जनवरी 2025 को दर्ज एफआईआर से हुई थी। इसमें टोल प्लाजा पर धोखाधड़ी से जुड़ी शिकायतें सामने आई थीं। इसके बाद उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने अतरैला शिव गुलाम टोल प्लाजा पर टोल वसूली में कथित फर्जीवाड़े का खुलासा किया था।
जांच के दौरान सामने आया कि जिन वाहनों के फास्टैग में पर्याप्त बैलेंस नहीं था या फास्टैग उपलब्ध नहीं था, उनसे टोल वसूलने के लिए कथित तौर पर अवैध मोबाइल ऐप का इस्तेमाल किया जा रहा था। बताया गया कि ये ऐप फर्जी रसीदें जारी करते थे और वसूली गई रकम को एनएचएआई के आधिकारिक सॉफ्टवेयर में दर्ज होने से छिपाने में मदद करते थे।
इसी एफआईआर के आधार पर ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत जांच शुरू की। एजेंसी ने उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल और दिल्ली-एनसीआर में 14 परिसरों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया।
जांच में ‘मोबडेटा’ और ‘एनी’ नामक दो अनधिकृत एप्लीकेशन के इस्तेमाल का भी पता चला है। आरोप है कि इन एप्लीकेशन के जरिए देशभर के करीब 100 टोल प्लाजा पर गैर-फास्टैग या संबंधित वाहनों से कथित तौर पर अनधिकृत वसूली की जाती थी। इस पूरी गतिविधि की निगरानी के लिए एक अलग पोर्टल के इस्तेमाल की बात भी जांच में सामने आई है।
ईडी अब बरामद दस्तावेजों, डिजिटल उपकरणों, बैंक खातों और अन्य वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है। एजेंसी का उद्देश्य कथित टोल वसूली नेटवर्क से जुड़े लोगों की भूमिका और अवैध तरीके से अर्जित धन के प्रवाह का पता लगाना है। मामले में आगे की जांच के बाद घोटाले की पूरी तस्वीर और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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