सागर जहरीली शराब कांड: 20 साल से जमीं आबकारी अधिकारी की बदली जिम्मेदारी, कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल
सागर। सागर के बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। इसी बीच करीब 20 वर्षों से सागर में पदस्थ सहायक जिला आबकारी अधिकारी मंजूषा सोनी की जिम्मेदारी बदल दी गई है। हालांकि, उपलब्ध आदेश के अनुसार उन्हें सागर से बाहर नहीं भेजा गया है, बल्कि विदेशी मदिरा भंडार सागर (एफएल-10) के प्रभारी पद से हटाकर सहायक जिला आबकारी अधिकारी, संभागीय उड़नदस्ता सागर के कार्यालय में पदस्थ किया गया है। आदेश में उन्हें हटाने का कारण स्पष्ट नहीं किया गया है।
मामले ने इसलिए भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं क्योंकि सागर में लंबे समय से उनकी पदस्थापना को लेकर सवाल उठते रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि कोई अधिकारी इतने लंबे समय तक एक ही जिले में कैसे पदस्थ रहा और इस दौरान उसकी कार्यप्रणाली की समीक्षा किस स्तर पर होती रही?
जहरीली शराब कांड के बाद अब जिम्मेदारी तय करने की मांग भी तेज हो गई है। प्रशासन ने इस मामले में कई अधिकारियों पर कार्रवाई की है और विभागीय लापरवाही की जांच भी की जा रही है। मजिस्ट्रियल जांच में यह पता लगाया जाना है कि जहरीली शराब कहां बनी, उसे किसने स्टोर और वितरित किया तथा कहीं विभागीय स्तर पर लापरवाही तो नहीं हुई।
ऐसे में सिर्फ पद बदल देना क्या पर्याप्त कार्रवाई है? यह सवाल इसलिए भी अहम है क्योंकि स्थानांतरण या जिम्मेदारी में बदलाव अपने आप में दोष सिद्ध नहीं करता। यदि जांच में किसी अधिकारी की लापरवाही या जिम्मेदारी सामने आती है, तो उसके आधार पर नियमानुसार विभागीय और कानूनी कार्रवाई तय होनी चाहिए।
सागर की त्रासदी ने पूरे आबकारी तंत्र की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। इसलिए जरूरत केवल अधिकारियों के पद बदलने की नहीं, बल्कि यह तय करने की है कि इतनी बड़ी घटना के लिए प्रशासनिक स्तर पर किसकी जवाबदेही बनती है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए व्यवस्था में क्या बदलाव किए जाएंगे।
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