पंचायतें नवाचार अपनाकर जिले की पहचान राज्य स्तर तक पहुंचाएं : कलेक्टर
विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) 2025 अंतर्गत VB-GRAMG योजना के बेहतर क्रियान्वयन हेतु पंचायत राज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधियों का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर गुरुवार को शुभ-विदाई गार्डन, गायत्री मंदिर के सामने, गुना में जिला स्तरीय ‘पंच सम्मेलन’ आयोजित हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती पूजन के साथ हुआ।

रूटीन कार्यों के साथ नए नवाचारों पर दें जोर
कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल ने पंचायत प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि पंचायत स्तर पर रूटीन कार्यों के साथ नए नवाचारों को अपनाने की आवश्यकता है। ऐसे नवाचार किए जाएं, जिनसे गांवों का विकास होने के साथ-साथ जिले की पहचान राज्य स्तर तक बने। उन्होंने कहा कि किसी भी बड़े कार्य को सामूहिक प्रयासों से बेहतर ढंग से पूरा किया जा सकता है। इसमें पंचायत प्रतिनिधियों, ग्रामीणों एवं संबंधित विभागों की सहभागिता महत्वपूर्ण है।
तालाबों के साथ मछली पालन को दें बढ़ावा
कलेक्टर ने कहा कि प्रत्येक पंचायत स्तर पर जल संरक्षण को प्राथमिकता दी जाए। गांवों में तालाब एवं पेयजल की पर्याप्त सुविधा विकसित होने से न केवल जल उपलब्धता सुनिश्चित होगी, बल्कि मछली पालन जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जा सकता है। इससे ग्रामीणों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर भी निर्मित होंगे।

किसानों की आय बढ़ाने के लिए अपनाएं नए मॉडल
उन्होंने कहा कि विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आय बढ़ाना महत्वपूर्ण है। किसानों द्वारा सब्जी उत्पादन, गुलाब की खेती एवं अन्य कृषि गतिविधियों के माध्यम से आय में उल्लेखनीय वृद्धि के मॉडल तैयार किए गए हैं। कुछ किसानों ने सब्जी उत्पादन से अपनी आय को लगभग 05 लाख रुपये तक, थाई पिंक अमरूद से 10 लाख तथा गुलाब की खेती से 15 लाख रुपये तक पहुंचाया है। ऐसे सफल मॉडलों को पंचायत स्तर पर प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है।
हर पंचायत में दो नवाचार अपनाने का आह्वान
कलेक्टर श्री कन्याल ने पंचायत प्रतिनिधियों से विशेष रूप से दो नवाचार अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को पशुपालन एवं प्राकृतिक खेती से जोड़ने के लिए प्रत्येक गांव में परिवारों द्वारा कम से कम एक गाय को गोद लेने की पहल की जा सकती है। भविष्य में तकनीकी सहयोग के माध्यम से गो आधारित प्राकृतिक खेती को बड़े क्षेत्र में मॉडल के रूप में विकसित किया जा सकता है।

उन्होंने दूसरा नवाचार कृषि पैटर्न में बदलाव से संबंधित बताया। किसानों को परंपरागत कृषि के साथ हॉर्टिकल्चर एवं आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जाए। प्राकृतिक खेती से उत्पादित खाद्य पदार्थ स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होने के साथ किसानों की आय बढ़ाने में भी सहायक होंगे।
आयुष पद्धति में बीमारी से बचाव पर जोर
कलेक्टर ने आयुष चिकित्सा पद्धति का उल्लेख करते हुए कहा कि इसकी विशेषता बीमारी होने के बाद उपचार से ज़्यादा बचाव पर जोर देता है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ जीवनशैली एवं उचित पद्धतियों को अपनाकर बीमारियों से बचाव किया जा सकता है। पंचायत स्तर पर स्वास्थ्य एवं जनजागरूकता से जुड़ी गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जाना चाहिए। कार्यक्रम के अंत में पंचायत व्यवस्था से जुड़े उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित किया गया।
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