काशी में पत्रकार विजय शंकर यादव का निधन, परिजन नहीं पहुंचे तो अमन कबीर सेवा न्यास ने निभाया अंतिम संस्कार का दायित्व
वाराणसी। लंबे समय तक पत्रकारिता से जुड़े रहे विजय शंकर यादव का निधन शीरगोवर्धन स्थित एक मकान में हो गया। उनके निधन की सूचना मिलने के बाद जब मौके पर लोग पहुंचे तो पता चला कि अंतिम समय में उनके साथ परिवार का कोई सदस्य मौजूद नहीं था। सूचना मिलने पर अमन कबीर सेवा न्यास के सदस्यों ने आगे बढ़कर उनके अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी निभाई।
जानकारी के अनुसार, विजय शंकर यादव करीब दो वर्षों से सेवानिवृत्त जीवन बिताते हुए शीरगोवर्धन स्थित मकान में रह रहे थे। उनके पास मिले आधार कार्ड और पत्रकार पहचान-पत्र से उनकी पहचान हुई। पत्रकार पहचान-पत्र पर उन्हें ‘राजनीतिक संवाददाता’ के रूप में दर्ज किया गया था। आधार कार्ड में उनका पता संस्कृत विश्वविद्यालय, संपूर्णानंद, C-27/65, जगतगंज दर्ज था, लेकिन बताया गया कि यह मकान अब बिक चुका है।

मृतक के परिजनों से संपर्क करने का प्रयास किया गया। उनकी पत्नी से भी संपर्क हुआ, जिन्होंने बताया कि दोनों का तलाक हो चुका है। अन्य रिश्तेदारों से भी संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनके अंतिम समय में कोई परिजन मौके पर नहीं पहुंच सका। मामले की सूचना पुलिस को भी दी गई।
इसके बाद अमन कबीर सेवा न्यास के सदस्यों ने विजय शंकर यादव को अपना मानते हुए उनके अंतिम संस्कार का दायित्व संभाला। हरिश्चंद्र घाट पर हिंदू रीति-रिवाज और विधि-विधान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया तथा मुखाग्नि दी गई।

विजय शंकर यादव ने अपने पत्रकारिता जीवन में लंबे समय तक समाज और लोगों से जुड़े मुद्दों को अपनी कलम के माध्यम से सामने रखा। लेकिन जीवन के अंतिम पड़ाव पर उनके साथ कोई करीबी परिजन मौजूद नहीं था। ऐसे में सेवा न्यास के सदस्यों ने इंसानियत का परिचय देते हुए उन्हें सम्मानजनक अंतिम विदाई दी।
अमन कबीर सेवा न्यास की ओर से कहा गया कि रिश्ते केवल खून से नहीं, बल्कि संवेदना और इंसानियत से भी बनते हैं। संस्था ने कहा कि जब किसी व्यक्ति के अंतिम समय में उसके अपने साथ नहीं होते, तब समाज का दायित्व बनता है कि वह आगे बढ़कर उसे सम्मान और गरिमा के साथ अंतिम विदाई दे।
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