रूस चुनाव: पुतिन की यूनाइटेड रशिया की बढ़त के बीच विपक्षी दलों के वोटों ने बढ़ाई चिंता, क्या मिले असंतोष के संकेत?
मॉस्को। रूस के संसदीय चुनाव के शुरुआती नतीजों में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की यूनाइटेड रशिया पार्टी मजबूत बढ़त बनाए हुए है। 90 फीसदी से अधिक मतों की गिनती में पार्टी को 57.86 फीसदी वोट मिले हैं। इसके बावजूद बर्लिन स्थित थिंक टैंक एनईएसटी के आकलन के अनुसार, कुछ विपक्षी दलों को मिले वोटों में पुतिन सरकार और यूनाइटेड रशिया के प्रति मौन असंतोष के संकेत देखे जा सकते हैं।
शुरुआती नतीजों में यूनाइटेड रशिया से पीछे रहने के बावजूद कम्युनिस्ट पार्टी, एलडीपीआर, न्यू पीपल और ए जस्ट रशिया के उम्मीदवार संसद में सीटें जीतने की स्थिति में हैं। इनमें से कई दल कई मुद्दों पर संसद में यूनाइटेड रशिया के साथ मतदान भी करते हैं। हालांकि, एनईएसटी का कहना है कि खास तौर पर कम्युनिस्ट पार्टी और न्यू पीपल को मिले कुछ वोटों को केवल उनकी नीतियों के समर्थन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इन वोटों में कुछ मतदाताओं की नाराजगी या असंतोष भी शामिल हो सकता है।
रूस में शुक्रवार से शुरू हुआ संसदीय चुनाव रविवार को समाप्त हुआ। यह यूक्रेन में पूर्ण युद्ध शुरू होने के बाद रूस का पहला संसदीय चुनाव है। इसमें निचले सदन स्टेट ड्यूमा के सदस्यों का चुनाव किया गया। शुरुआती नतीजों से संकेत मिल रहे हैं कि यूनाइटेड रशिया संसद में अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखने में सफल रहेगी।
हालांकि, चुनाव में पुतिन की नीतियों का विरोध करने वाले राजनीतिक विकल्प सीमित रहे। युद्ध का विरोध करने वाले अधिकांश उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं मिली। उदारवादी याब्लोको पार्टी के उम्मीदवारों ने भी अपनी स्वतंत्रता को लेकर चिंता जताई थी।
यूनाइटेड रशिया की बढ़त को पहले से ही मजबूत माना जा रहा था। चुनावी परिस्थितियों में पार्टी के सामने राष्ट्रपति की नीतियों का विरोध करने वाले विकल्प सीमित थे। क्रेमलिन ने चुनाव को यूक्रेन में युद्ध और आर्थिक मुश्किलों के बीच जनता को अपनी राय रखने का अवसर बताया था। वहीं, एनईएसटी के आकलन के मुताबिक आर्थिक दबाव और रूस-यूक्रेन युद्ध के असर के बीच कुछ मतदाताओं का रुख सिस्टम के भीतर मौजूद विपक्षी दलों की ओर जाना सरकार के लिए असहज संकेत माना जा सकता है।
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