पांच वर्षों में 23 आईआईटी में 45 छात्रों ने की आत्महत्या, 28 छात्र एससी-एसटी और ओबीसी वर्ग से
नई दिल्ली। देश के 23 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) में 2020-21 से 2024-25 के बीच छात्रों की आत्महत्या के 45 मामले सामने आए हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इनमें 28 छात्र अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से थे। इनमें 12 ओबीसी, नौ एससी और सात एसटी समुदाय के छात्र शामिल हैं। वहीं, 16 छात्र सामान्य वर्ग और एक छात्र ईडब्ल्यूएस श्रेणी से था।
ये आंकड़े 8 दिसंबर 2025 को लोकसभा में पूछे गए एक तारांकित प्रश्न के जवाब के लिए सभी आईआईटी से जुटाई गई जानकारी के आधार पर तैयार किए गए थे। पांच वर्षों में सामने आए कुल मामलों में एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों की हिस्सेदारी 62 प्रतिशत से अधिक रही।
आंकड़ों के अनुसार, 2023-24 में आईआईटी में छात्रों की आत्महत्या के मामलों में सबसे अधिक बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस वर्ष 16 छात्रों ने आत्महत्या की, जबकि 2022-23 में यह संख्या छह थी। इसके बाद 2024-25 में 13 मामले सामने आए।
आईआईटीवार आंकड़ों की बात करें तो आईआईटी हैदराबाद में पांच वर्षों के दौरान सबसे अधिक सात मामले सामने आए। आईआईटी खड़गपुर, आईआईटी दिल्ली और आईआईटी कानपुर में छह-छह मामले दर्ज किए गए। वहीं, आईआईटी मद्रास में पांच और आईआईटी (बीएचयू) वाराणसी में चार छात्रों की आत्महत्या के मामले सामने आए।
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