ईडी की बड़ी कार्रवाई: एनएचएआई में फर्जी टोल वसूली मामले में 14 ठिकानों पर छापेमारी, डिजिटल सबूतों की तलाश
नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के टोल प्लाजा पर कथित फर्जी वसूली और धन शोधन से जुड़े मामले में देशभर के 14 ठिकानों पर छापेमारी की है। धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश, एनसीआर और कोलकाता समेत कई स्थानों पर की गई।
जांच के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की आधिकारिक व्यवस्था के समानांतर एक फर्जी सॉफ्टवेयर तैयार किया था। इसके जरिए टोल वसूली का बड़ा हिस्सा सरकारी रिकॉर्ड से बाहर रखने का आरोप है। यूपी एसटीएफ की जांच में सामने आया कि कुल टोल वसूली का कथित तौर पर केवल करीब पांच प्रतिशत हिस्सा सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज किया जाता था, जबकि बाकी रकम का हिसाब कथित तौर पर अलग तरीके से किया जाता था।
ईडी ने इस मामले में दर्ज दो पुलिस एफआईआर के आधार पर धन शोधन की जांच शुरू की। जांच के दौरान फोरेंसिक विश्लेषण और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के रिकॉर्ड से कथित फर्जी सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल की पुष्टि होने की बात सामने आई है।
फर्जी रसीदों के जरिए वसूली का आरोप
एफआईआर के मुताबिक, फर्जी सॉफ्टवेयर के जरिए टोल की रसीदें तैयार की जाती थीं और वसूली की रकम को आधिकारिक अकाउंटिंग सिस्टम से बाहर डायवर्ट किए जाने का आरोप है। ईडी की ताजा कार्रवाई का उद्देश्य कथित फर्जीवाड़े से जुड़े डिजिटल और अन्य सबूत जुटाना, इसमें शामिल लोगों की पहचान करना और अपराध से अर्जित रकम का पता लगाना है।
पारीमैच मामले में भी कई जगह कार्रवाई
इसके अलावा ईडी ने ऑनलाइन सट्टेबाजी फर्म ‘पारीमैच’ से जुड़े एक अलग धन शोधन मामले में भी कई राज्यों में छापेमारी की है। अधिकारियों के अनुसार, महाराष्ट्र में पांच, दिल्ली-एनसीआर में चार, राजस्थान में दो और गुजरात में एक स्थान पर तलाशी ली गई।
जांच एजेंसी के अनुसार, कार्रवाई के दायरे में कुछ पेमेंट कंपनियां, चार्टर्ड अकाउंटेंट और कंपनी सेक्रेटरी भी शामिल हैं। आरोप है कि इन माध्यमों के जरिए सट्टेबाजी से प्राप्त रकम को नकदी में बदलने और पेमेंट गेटवे के माध्यम से कथित तौर पर अवैध तरीके से विदेश भेजने में मदद की गई। जांच में कथित फर्जी विदेशी प्रत्यक्ष निवेश से जुड़े लेनदेन की भी पड़ताल की जा रही है।
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