दिल्ली में चार मंजिला इमारत ढही, मलबे में छात्रों के फंसे होने की आशंका; ‘ऑपरेशन जिंदगी’ के बीच गरमाई राजनीति
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के मोती बाग स्थित सत्य निकेतन इलाके में रविवार को चार मंजिला इमारत ढहने से हड़कंप मच गया। बताया जा रहा है कि इमारत का इस्तेमाल दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए पीजी के तौर पर किया जा रहा था। मलबे में कई छात्रों के फंसे होने की आशंका के बाद एनडीआरएफ, दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग, एमसीडी, डीडीएमए और सिविल डिफेंस की टीमें राहत एवं बचाव अभियान में जुट गईं।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हादसे पर चिंता जताते हुए कहा कि सभी संबंधित एजेंसियां आपसी समन्वय के साथ बचाव अभियान चला रही हैं। उन्होंने कहा कि मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
स्थानीय भाजपा विधायक अनिल शर्मा ने भी घटनास्थल का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि कुछ छात्रों के मलबे के अंदर से फोन करने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, उन्होंने कहा कि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि मलबे में कितने लोग फंसे हुए हैं। प्रशासन की ओर से बचाव अभियान लगातार जारी है।
डूसू अध्यक्ष आर्यन मान के मुताबिक, हादसे के समय मौके पर करीब 15 से 20 छात्र मौजूद थे। इनमें से 10 से 15 छात्रों को सुरक्षित निकालकर अस्पताल भेजे जाने की जानकारी दी गई है। फिलहाल किसी के हताहत होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
हादसे के बाद दिल्ली की राजनीति भी गरमा गई है। आम आदमी पार्टी ने एमसीडी के भवन विभाग की कार्यप्रणाली और भ्रष्टाचार को लेकर सवाल उठाए हैं। आप नेता सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि एमसीडी के बिल्डिंग विभाग में कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर अनियमितताएं हैं। उन्होंने दावा किया कि एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के तबादले की कीमत 1.25 करोड़ रुपये तक बताई जाती है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
आप नेता आतिशी ने हादसे को बेहद चिंताजनक बताते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि अगर किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
फिलहाल प्रशासन और बचाव दल का पूरा ध्यान मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने पर है। वहीं, हादसे के बाद इमारत की स्थिति, निर्माण और सुरक्षा मानकों को लेकर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इमारत गिरने की वास्तविक वजह क्या थी और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
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