55 दिन, 1700 किमी पदयात्रा के बाद बाबा बर्फानी के दरबार पहुंचे दिनेश शर्मा 'स्नेही'
सिकंदराराऊ(आरएनआई)निकटवर्ती कस्बा पुरदिल नगर के युवा सनातन धर्म प्रेमी एवं समाजसेवी दिनेश शर्मा 'स्नेही' ने अदम्य साहस, अटूट आस्था और दृढ़ संकल्प का परिचय देते हुए लगातार 55 दिनों की लगभग 1700 किलोमीटर लंबी पदयात्रा पूर्ण कर पवित्र श्री अमरनाथ गुफा में विराजमान बाबा बर्फानी के दिव्य दर्शन किए। उनकी यह कठिन तपस्वी यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बनी, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा और गर्व का विषय भी बन गई।ज्ञात हो कि श्री स्नेही 10 मई को अपने निवास पुरदिल नगर से नगर भ्रमण एवं नागरिकों के आशीर्वाद के उपरांत अमरनाथ धाम के लिए पैदल रवाना हुए थे। इस लंबी और कठिन यात्रा के दौरान उन्होंने अनेक सिद्धपीठों एवं शक्तिपीठों में दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इनमें कर्णवास, बेलोन, चौड़रे वाली देवी, शाकंभरी देवी, हरिद्वार, ऋषिकेश, नैना देवी, चिंतपूर्णी देवी, ज्वाला देवी, नागरकोट (ब्रजेश्वरी देवी), बगलामुखी देवी, चामुंडा देवी तथा माता वैष्णो देवी सहित अनेक प्रमुख तीर्थ शामिल रहे। अंततः सभी पावन धामों की यात्रा पूर्ण करते हुए उन्होंने बाबा बर्फानी के श्रीचरणों में शीश नवाकर अपनी तपस्या को पूर्णता प्रदान की।यात्रा के दौरान उन्हें दुर्गम पर्वतीय मार्गों, प्रतिकूल मौसम, शारीरिक थकान तथा सीमित संसाधनों जैसी अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद उनका संकल्प कभी कमजोर नहीं पड़ा और उन्होंने प्रत्येक कठिनाई को अपनी साधना का हिस्सा मानते हुए निरंतर आगे बढ़ना जारी रखा।दर्शन के उपरांत स्नेही ने बताया कि कश्मीर की प्राकृतिक सुंदरता वास्तव में अद्भुत है। ऊँचे-ऊँचे पर्वत, हरी-भरी वादियाँ और मनमोहक दृश्य इसे धरती का स्वर्ग होने का एहसास कराते हैं। वहीं यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और कुछ स्थानों के वातावरण को देखकर उन्हें यह भी अनुभव हुआ कि बाहरी यात्रियों के मन में कभी-कभी असुरक्षा की भावना उत्पन्न हो सकती है। उन्होंने बाबा बर्फानी से प्रार्थना की कि कश्मीर में स्थायी शांति, सौहार्द और समृद्धि बनी रहे तथा देश-विदेश से आने वाले सभी श्रद्धालु सदैव सुरक्षित और निश्चिंत होकर इस पवित्र यात्रा का लाभ उठा सकें।
श्री स्नेही ने कहा कि उनका शेष जीवन समाज में जागरूकता फैलाने, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रसार तथा सनातन संस्कृति, भारतीय संस्कारों और राष्ट्रभावना को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए समर्पित रहेगा। उनका मानना है कि यदि युवा अपने धर्म, संस्कृति और इतिहास से जुड़े रहेंगे, तभी राष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित और सशक्त बनी रहेगी।उन्होंने युवाओं से आह्वान करते हुए कहा कि जीवन में कोई भी लक्ष्य दृढ़ संकल्प, अनुशासन और निरंतर प्रयास के बिना प्राप्त नहीं किया जा सकता। कठिन परिस्थितियाँ मनुष्य की परीक्षा अवश्य लेती हैं, लेकिन वही परिस्थितियाँ उसके व्यक्तित्व को भी निखारती हैं।दिनेश शर्मा 'स्नेही' की यह 55 दिवसीय पदयात्रा आज केवल एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि आस्था, तप, अनुशासन, आत्मविश्वास और सनातन चेतना का जीवंत संदेश बन चुकी है। पुरदिल नगर एवं आसपास के क्षेत्रों के नागरिकों ने उनकी इस ऐतिहासिक यात्रा की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे पूरे क्षेत्र के लिए गौरव और प्रेरणा का क्षण बताया है।
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