सात साल बाद फिर खुला कैलाश मानसरोवर का मार्ग, नाथू ला दर्रे से आज रवाना होगा पहला जत्था
गंगटोक/नई दिल्ली। (आरएनआई) सात वर्षों के लंबे अंतराल के बाद बहुप्रतीक्षित कैलाश मानसरोवर यात्रा का शुभारंभ शनिवार से होने जा रहा है। श्रद्धालुओं का पहला जत्था सिक्किम स्थित नाथू ला दर्रे से पवित्र कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील की आध्यात्मिक यात्रा पर रवाना होगा। भारत और चीन के सहयोग से आयोजित इस यात्रा की वापसी को श्रद्धालुओं के लिए एक ऐतिहासिक और भावनात्मक क्षण माना जा रहा है।
इस वर्ष कुल 500 तीर्थयात्री नाथू ला मार्ग से कैलाश मानसरोवर यात्रा करेंगे। यात्रियों को 50-50 श्रद्धालुओं के 10 जत्थों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक दल के साथ एक संपर्क अधिकारी और चिकित्सा सहायक की नियुक्ति की गई है, ताकि यात्रा के दौरान समुचित समन्वय और स्वास्थ्य संबंधी सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
यात्रा प्रारंभ होने से पूर्व चीन में भारत के राजदूत विक्रम दोराईस्वामी ने वीडियो संदेश जारी कर तीर्थयात्रियों का स्वागत किया और यात्रा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। भारतीय दूतावास ने भी संदेश जारी कर सभी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए सुरक्षित एवं सफल यात्रा की कामना की।
दूतावास के अनुसार राजदूत विक्रम दोराईस्वामी और उनकी टीम ने हाल ही में सिक्किम के नाथू ला दर्रे तथा उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से जुड़े प्रमुख ट्रांजिट प्वाइंट्स का दौरा कर तैयारियों और लॉजिस्टिक व्यवस्थाओं की समीक्षा की थी। यात्रा मार्ग पर आवास, भोजन, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य आवश्यक सुविधाओं को लेकर व्यापक इंतजाम किए गए हैं।
राजदूत ने बताया कि नाथू ला सीमा पार करने के बाद श्रद्धालुओं का स्वागत चीनी सीमा शुल्क और इमिग्रेशन अधिकारियों द्वारा किया जाएगा। इसके बाद यात्रियों को बसों के माध्यम से तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के याडोंग काउंटी ले जाया जाएगा, जहां से उनकी आगे की यात्रा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगी।
भारतीय दूतावास ने कहा है कि यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए समय-समय पर नई एडवाइजरी और मार्गदर्शक वीडियो भी जारी किए जाएंगे। प्रशासन और दोनों देशों की एजेंसियों ने यात्रा को सुरक्षित, व्यवस्थित और आध्यात्मिक रूप से यादगार बनाने के लिए व्यापक तैयारियां की हैं।
कैलाश मानसरोवर यात्रा को हिंदू, बौद्ध, जैन और बोन धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। सात वर्षों बाद यात्रा की पुनः शुरुआत से देशभर के श्रद्धालुओं में उत्साह और श्रद्धा का माहौल है।
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