'पाकिस्तान नहीं, इंडोनेशिया से लें प्रेरणा', हिंदू-मुस्लिम संबंधों पर आरएसएस नेता सुनील आंबेकर का बड़ा बयान*
पुणे (आरएनआई) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने हिंदू-मुस्लिम संबंधों, सांस्कृतिक पहचान और जनसंख्या संतुलन जैसे विषयों पर अपनी राय रखते हुए कहा कि देश में हिंदू-मुस्लिम संघर्ष समाप्त होना चाहिए, क्योंकि सभी भारतीयों का डीएनए एक ही है। उनके इस बयान ने सामाजिक और राजनीतिक हलकों में नई चर्चा को जन्म दिया है।
पुणे में पत्रकारों से बातचीत के दौरान आंबेकर ने कहा कि हिंदू-मुस्लिम विवाद आरएसएस की स्थापना से भी पहले का विषय रहा है। उन्होंने कहा कि समय के साथ कुछ वर्गों में यह धारणा विकसित हुई कि धर्म परिवर्तन के साथ राष्ट्र, इतिहास और सांस्कृतिक पहचान भी बदल जाती है। उनके अनुसार, इसी सोच ने आगे चलकर अलगाववादी प्रवृत्तियों को बढ़ावा दिया और देश के विभाजन की पृष्ठभूमि तैयार हुई।
उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि इस प्रकार के संघर्षों को समाप्त कर सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता को मजबूत किया जाए। आंबेकर ने यह भी कहा कि मुस्लिम समाज के भीतर सामाजिक सुधार और सकारात्मक बदलाव के प्रयास दिखाई दे रहे हैं, जो देश के लिए उत्साहजनक संकेत हैं।
भारतीय मुसलमानों की सांस्कृतिक पहचान पर टिप्पणी करते हुए आरएसएस नेता ने कहा कि उन्हें प्रेरणा के लिए पाकिस्तान की ओर देखने के बजाय इंडोनेशिया जैसे देशों की ओर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि इंडोनेशिया दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला देश है, लेकिन वहां की संस्कृति में हिंदू और बौद्ध परंपराओं का प्रभाव आज भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। उनके अनुसार, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं, बल्कि दोनों साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं।
आंबेकर ने यह भी कहा कि भारतीय मुसलमानों को भारत की सांस्कृतिक परंपराओं और ऐतिहासिक विरासत के साथ अपने संबंधों को मजबूत बनाए रखना चाहिए। उन्होंने जनसंख्या संतुलन के महत्व का भी उल्लेख किया, हालांकि स्पष्ट किया कि आरएसएस परिवार के आकार को लेकर कोई निर्देश नहीं देता।
संघ की वैधानिक स्थिति पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि आरएसएस एक कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त संगठन है, जो लंबे समय से सामाजिक और राष्ट्र निर्माण से जुड़े विभिन्न कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
सुनील आंबेकर के इन बयानों को देश में सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय एकता पर चल रही बहस के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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