तकनीक का नैतिक उपयोग कर देश के विकास में योगदान दें युवा: उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन
तिरुवनंतपुरम (आरएनआई)। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने युवाओं और नए स्नातकों से आह्वान किया है कि वे डिजिटल तकनीक का नैतिक, रचनात्मक और जिम्मेदार उपयोग करते हुए देश के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि आज का युग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन, जैव प्रौद्योगिकी और डिजिटल कनेक्टिविटी का है, जो मानव जीवन के हर पहलू को तेजी से बदल रहा है, और ऐसे में युवाओं की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
पांडिचेरी केंद्रीय विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र में आयोजित 30वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षित नागरिक होने के नाते युवाओं को तकनीक का इस्तेमाल केवल सुविधा के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्रीय विकास के एक सशक्त माध्यम के रूप में करना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि डिजिटल तकनीक कहीं युवाओं की गहन सोच, विश्लेषण और विवेक को कमजोर न कर दे, इसलिए इसका उपयोग उत्साह के साथ-साथ नैतिक सतर्कता के साथ किया जाना चाहिए।
उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहने की अपील करते हुए कहा कि नशा केवल व्यक्ति ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की प्रगति को भी कमजोर करता है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे न केवल स्वयं इससे दूर रहें, बल्कि अपने मित्रों और साथियों को भी इस बुराई से बचाने में मदद करें। उपराष्ट्रपति ने समय प्रबंधन के महत्व पर भी जोर देते हुए कहा कि सफलता का मार्ग अनुशासन और सही प्राथमिकताओं से होकर गुजरता है।
अपने संबोधन में राधाकृष्णन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक ‘विकसित भारत’ के विजन का उल्लेख करते हुए इसे देश के भविष्य का स्पष्ट रोडमैप बताया। उन्होंने कहा कि विकास तभी सार्थक होगा जब वह समावेशी हो और समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चले। उन्होंने युवाओं को सामाजिक और राष्ट्रीय विकास का दूत बताते हुए कहा कि शिक्षा कुछ लोगों का विशेषाधिकार नहीं, बल्कि हर नागरिक का मौलिक अधिकार है।
इससे पहले तिरुवनंतपुरम में ‘त्रिवेंद्रम फेस्ट 2025’ को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने केरल की सांस्कृतिक विविधता और सह-अस्तित्व की परंपरा की सराहना की। उन्होंने कहा कि त्योहार समाज को जोड़ने और समावेशी विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जो ‘विकसित भारत’ की अवधारणा से पूरी तरह मेल खाते हैं। ईसाई समुदाय के योगदान की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि इस समुदाय ने हमेशा आधुनिकता, शिक्षा और आर्थिक विकास के प्रति दूरदर्शी दृष्टिकोण अपनाया है, जिससे देश को निरंतर लाभ मिला है।
उपराष्ट्रपति ने अंत में युवाओं से जीवन की चुनौतियों का डटकर सामना करने और अपने ज्ञान व कौशल से राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
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