डॉ. अंबेडकर के विचार समाज को जोड़ने और संविधान के प्रति आस्था मजबूत करने की प्रेरणा देते हैं — डॉ. अजय खेमरिया
गुना संविधान निर्माता भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर गुना नगर में स्वर्गीय नाथूलाल मंत्री जन कल्याण न्यास के तत्वावधान में एक गरिमामयी व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राजेश गोयल (जिला शिक्षा अधिकारी, गुना) उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता न्यास के अध्यक्ष अशोक कुशवाहा ने की, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. अजय खेमरिया (आयुक्त, दिव्यांगजन आयोग, मध्य प्रदेश शासन) ने अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता एवं डॉ अबेडकर जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। तत्पश्चात अतिथियों का स्वागत श्रीफल एवं पुष्पमालाओं से किया गया।
अध्यक्षीय उद्बोधन में अशोक कुशवाहा ने बताया कि स्व. नाथूलाल मंत्री जन कल्याण न्यास की स्थापना 14 मई 1991 को हुई थी। यह न्यास समाज के सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक उत्थान के लिए निरंतर कार्यरत है तथा समय-समय पर कुटुंब प्रबोधन, पारिवारिक मिलन, ज्ञानप्रबोधिनी एवं प्रबुद्धजन गोष्ठियों का आयोजन करता रहा है।
मुख्य अतिथि श्री राजेश गोयल ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. अंबेडकर का जीवन शिक्षा की शक्ति का सर्वोत्तम उदाहरण है। उन्होंने युवाओं एवं विद्यार्थियों से उनके आदर्शों को अपनाकर समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का आह्वान किया।
मुख्य वक्ता डॉ. अजय खेमरिया ने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर का जीवन केवल व्यक्तिगत संघर्ष की कहानी नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की प्रेरणादायक यात्रा है। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में शिक्षा को अपना सबसे सशक्त हथियार बनाकर राष्ट्र को समानता, न्याय और अधिकारों का मार्ग दिखाया।
उन्होंने कहा कि “शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो” का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है। डॉ. अंबेडकर के विचार हमें सामाजिक भेदभाव और असमानता के विरुद्ध संगठित प्रयास करने की प्रेरणा देते हैं।
डॉ. खेमरिया ने यह भी कहा कि आज आवश्यकता है कि हम उनके विचारों को केवल स्मरण तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें अपने आचरण और सामाजिक जीवन में उतारें। उन्होंने सामाजिक समरसता, संवैधानिक मूल्यों, मानवाधिकारों एवं लोकतांत्रिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने में प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भूमिका पर जोर दिया।
उन्होंने विशेष रूप से दिव्यांगजन, वंचित एवं पिछड़े वर्गों के उत्थान हेतु संचालित योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि डॉ. अंबेडकर का सपना तभी साकार होगा, जब समाज का अंतिम व्यक्ति भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ेगा।
कार्यक्रम में अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए डॉ. अंबेडकर के आदर्शों को अपनाने और समाज में जागरूकता फैलाने का आह्वान किया। अंत में सभी उपस्थितजनों ने उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के अंत में आभार श्री कृष्ण गोपाल राठौर ने व्यक्त किया।
कार्यक्रम में नगर के गणमान्य नागरिक, मातृशक्ति, समाजसेवी एवं युवा बड़ी संख्या में उपस्थित थे
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