घटना के बाद की पुलिसिंग नहीं, अपराध से पहले कानून का खौफ जरूरी
शिवपुरी (आरएनआई) पुलिस का 24 घंटे में हत्यारों को पकड़ लेना कोई जश्न मनाने वाली बात नहीं है बल्कि यह सिस्टम के मुंह पर तमाचा है.
असली नाकामी तो यह है कि इन दरिंदों के अंदर कानून का रत्ती भर भी खौफ नहीं बचा था। महज खेत की मिट्टी उड़ने जैसे मामूली विवाद में बीच-बचाव करने आए एक बेगुनाह युवक की छाती पर ट्रैक्टर चढ़ा देना साबित करता है कि दबंगई अपने चरम पर है। एफआईआर दर्ज करना और जेल भेजना तो लाशें उठने के बाद की औपचारिकताएं हैं। अभिषेक की जान चली गई क्या पुलिस की ये गिरफ्तारी उसकी भरपाई कर पाएगी? जब तक ऐसे खून के प्यासे दरिंदों को फास्ट-ट्रैक कोर्ट के जरिए ऐसी खौफनाक सजा नहीं मिलेगी जो इनकी आने वाली पीढ़ियों की रूह कंपा दे तब तक यह दबंगई का नंगा नाच यूं ही चलता रहेगा। हमें घटना के बाद की पुलिसिंग नहीं बल्कि अपराधियों में अपराध से पहले का खौफ चाहिए ❗
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