कादीपुर में श्रद्धा से मनाई गई नागपंचमी, नाग देवता का विधि-विधान से पूजन कर मांगी सुख-शांति
कादीपुर क्षेत्र में नागपंचमी के अवसर पर आम जनमानस अपनी परम्परा को अच्छुण रखते हुए जगह जगह नाग देवता को दूध,धान का लावा, पुष्प, धूप-दीप से पूजन अर्चन कर मनवांछित फल की कामना किया। कादीपुर नगर क्षेत्र व आसपास के लोगों ने रानीपुर कायस्थ गांव स्थित रानीतारा सरोवर के पास नागदेवता स्थान पर विधि-विधान से पूजन किया।

नागपंचमी के पर्व पर अघोरपीठ बाबा सत्यनाथ मठ अल्देमऊ नूरपुर कादीपुर के पीठाधीश्वर अवधूत उग्र चण्डेश्वर कपाली बाबा ने नागपंचमी के विषय में जानकारी देते हुए बताया कि नाग पंचमी हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। हिन्दू पंचांग के अनुसार सावन माह की शुक्ल पक्ष के पंचमी को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन नाग देवता या सर्प की पूजा की जाती है और उन्हें दूध से स्नान कराया जाता है कहीं-कहीं दूध पिलाने की परम्परा है।

नाग पंचमी का त्योहार हर साल सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग देवताओं के प्रति सम्मान प्रकट करने, सर्प दंश के भय से मुक्ति पाने और परिवार की सुख-शांति व सुरक्षा की कामना के लिए मनाया जाता है। महाभारत काल में राजा जन्मेजय ने अपने पिता परीक्षित की मृत्यु का बदला लेने के लिए 'सर्प यज्ञ' किया था। इस यज्ञ को आस्तिक मुनि ने सावन शुक्ल पंचमी के दिन रोककर नागों की रक्षा की थी। तभी से नागों की पूजा की परंपरा शुरू हुई।

नागों को भगवान शिव का आभूषण माना जाता है। सावन का महीना शिव जी को प्रिय है, इसलिए इस दौरान नाग पूजा का महत्व बढ़ जाता है। मान्यता है कि इस दिन नाग देवता की पूजा करने से कुंडली के कालसर्प दोष और राहु-केतु के बुरे प्रभाव कम होते हैं।

सांप किसानों के मित्र माने जाते हैं जो खेतों के चूहों और कीटों को खाकर फसल बचाते हैं। सावन (बरसात) के मौसम में पानी भरने से नाग अपने बिलों से बाहर आ जाते हैं, जिससे इंसानों और जीवों का आमना-सामना होता है। प्रकृति के इस चक्र में जीवों को नुकसान न पहुँचाने और उनके प्रति आदर भाव रखने का संदेश यह पर्व देता है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)