सूरत के जंगलों में छोड़े गए 50 चीतल, तेंदुओं और इंसानों के बीच बढ़ते संघर्ष को कम करने की पहल*
गुजरात वन विभाग ने सूरत जिले के मांडवी जंगलों में तेंदुओं और इंसानों के बीच बढ़ते संघर्ष को कम करने के उद्देश्य से सासणगिर से लाए गए 50 चीतल (स्पॉटेड डियर) छोड़े हैं। इस पहल का मकसद जंगल में तेंदुओं के लिए प्राकृतिक शिकार उपलब्ध कराना, जैवविविधता को मजबूत करना और वन्यजीवों को भोजन की तलाश में मानव बस्तियों की ओर आने से रोकना है।
वन विभाग के अनुसार, चीतलों का स्थानांतरण तीन चरणों में किया गया। 23 मई को 21, 18 जून को 16 और 24 जून को 13 चीतल मांडवी जंगल में छोड़े गए। अधिकारियों का मानना है कि जंगल में प्राकृतिक शिकार की उपलब्धता बढ़ने से मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में कमी आएगी।
वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में राज्य सरकार विज्ञान आधारित संरक्षण उपायों को लागू कर रही है। उन्होंने बताया कि यह पहल वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत राज्य की दीर्घकालिक जैवविविधता संरक्षण रणनीति का हिस्सा है।
वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री प्रवीण माली ने कहा कि यदि तेंदुओं जैसे शिकारी वन्यजीवों को जंगल में ही पर्याप्त प्राकृतिक भोजन मिलता रहेगा, तो उनके आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आने की संभावना कम होगी।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन जयपाल सिंह ने बताया कि मांडवी वन रेंज में चीतल प्रजनन केंद्र भी स्थापित किया गया है, ताकि स्थानीय तृणाहारी वन्यजीवों की संख्या बढ़ाई जा सके।
सूरत सर्कल के वन संरक्षक पुनीत नैय्यर ने बताया कि चीतलों की सुरक्षा और मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति से निपटने के लिए आधुनिक उपकरणों से लैस एक विशेष क्विक रिस्पॉन्स टीम भी तैनात की गई है। वन विभाग लगातार चीतलों की निगरानी कर रहा है ताकि वे नए आवास में सुरक्षित रूप से अनुकूलित हो सकें।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)