सुप्रीम कोर्ट से आनंद सिंह लोढ़ा को बड़ी राहत: गैंगरेप मामले में दायर एसएलपी खारिज, हाईकोर्ट का एफआईआर निरस्तीकरण आदेश बरकरार

Wednesday, June 3, 2026 - 12:11
Updated: 2 months ago
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सुप्रीम कोर्ट से आनंद सिंह लोढ़ा को बड़ी राहत: गैंगरेप मामले में दायर एसएलपी खारिज, हाईकोर्ट का एफआईआर निरस्तीकरण आदेश बरकरार

ग्वालियर (आरएनआई)। प्रेस क्लब अध्यक्ष, प्रतिष्ठित व्यवसायी एवं समाजसेवी आनंद सिंह लोढ़ा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी कानूनी राहत मिली है। एक कथित महिला प्रशिक्षक द्वारा दर्ज कराए गए गैंगरेप प्रकरण में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट द्वारा एफआईआर निरस्त किए जाने के आदेश को चुनौती देने वाली स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिका दोबारा दाखिल करने में हुई देरी को माफ करते हुए मामले पर विचार किया, लेकिन मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के 22 सितंबर 2025 के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं पाया। इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने एसएलपी को निरस्त कर दिया। साथ ही मामले से जुड़े सभी लंबित आवेदनों का भी निपटारा कर दिया गया।

इस फैसले के बाद ग्वालियर हाईकोर्ट द्वारा एफआईआर क्रमांक 1002/2024 को निरस्त करने का आदेश बरकरार रहेगा और उससे संबंधित सभी कानूनी कार्यवाहियां समाप्त मानी जाएंगी।

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं का उल्लेख किया था। अदालत ने पाया कि कथित घटना और एफआईआर दर्ज होने के बीच दो से तीन वर्ष का लंबा अंतराल था, जिसका संतोषजनक कारण प्रस्तुत नहीं किया गया। न्यायालय ने यह भी नोट किया कि शिकायतकर्ता ने वर्ष 2023 में दर्ज कराई गई पूर्व शिकायत में बलात्कार या गैंगरेप जैसे गंभीर आरोप नहीं लगाए थे, जबकि बाद में इन आरोपों को जोड़ा गया।

हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि आनंद सिंह लोढ़ा का नाम प्रारंभिक शिकायतों में कहीं दर्ज नहीं था और उपलब्ध रिकॉर्ड से यह प्रतीत होता है कि शिकायतकर्ता से उनका परिचय भी बाद के समय में हुआ। अदालत ने परिस्थितियों को देखते हुए मामले को प्रतिशोध और दुर्भावना से प्रेरित माना था।

न्यायालय ने अपने निर्णय में ‘स्टेट ऑफ हरियाणा बनाम भजन लाल’ तथा ‘महमूद अली बनाम उत्तर प्रदेश राज्य’ जैसे महत्वपूर्ण फैसलों का हवाला देते हुए एफआईआर निरस्त करने को उचित ठहराया था।

सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद आनंद सिंह लोढ़ा को इस मामले में बड़ी राहत मिली है। फैसले के बाद उनके समर्थकों और शुभचिंतकों ने इसे न्याय और सत्य की जीत बताया है।

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