लेबनान पर जिम्मेदारी से काम लें नेतन्याहू, ईरान समझौता कांग्रेस को भेजेंगे: ट्रंप
एवियन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान इस्राइल, लेबनान और ईरान से जुड़े मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी। जी-7 सम्मेलन से इतर हुई इस बैठक में दोनों नेताओं ने वैश्विक और क्षेत्रीय हालात पर चर्चा की।
ट्रंप ने इस्राइल की सुरक्षा में अमेरिका की भूमिका को अहम बताते हुए दावा किया कि उनके नेतृत्व के बिना इस्राइल की स्थिति कहीं अधिक कमजोर हो सकती थी। उन्होंने इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ अपने संबंधों को अच्छा बताते हुए कहा कि अब उन्हें लेबनान के मुद्दे पर जिम्मेदारी और संयम के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
ईरान के साथ संभावित शांति समझौते पर ट्रंप ने कहा कि वह इसे समीक्षा के लिए अमेरिकी कांग्रेस के समक्ष भेजने के पक्ष में हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के समझौते को व्यापक समर्थन मिलना चाहिए। हालांकि, अमेरिकी संसद के कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने समझौते के विवरण सार्वजनिक करने की मांग की है और इसकी प्रभावशीलता को लेकर सवाल भी उठाए हैं। सांसदों का कहना है कि यह सुनिश्चित होना चाहिए कि समझौता ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकने में सक्षम हो।
इस बीच, स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्रालय ने संकेत दिया है कि अमेरिका और ईरान के बीच 19 जून को मध्य स्विट्जरलैंड के बुर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। इस संभावना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक गतिविधियों को और तेज कर दिया है।
उधर, ईरान के विदेश मंत्री ने क्षेत्रीय संघर्ष को लेकर महत्वपूर्ण बयान देते हुए कहा कि युद्ध की समाप्ति के लिए लेबनान में इस्राइली कब्जे का अंत होना आवश्यक है। उनके अनुसार लेबनान की स्वतंत्रता और संप्रभुता की बहाली क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने की प्रमुख शर्तों में शामिल है।
विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप के बयान, संभावित अमेरिका-ईरान समझौते और लेबनान को लेकर ईरान की शर्तों ने पश्चिम एशिया की राजनीति को एक बार फिर वैश्विक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
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