राम मंदिर गबन कांड में बड़ी कार्रवाई: एसआईटी ने ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र से की 4 घंटे पूछताछ, सीएम योगी के दौरे से चंपत राय को किया गया दूर

Friday, June 19, 2026 - 16:34
Updated: 3 months ago
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राम मंदिर गबन कांड में बड़ी कार्रवाई: एसआईटी ने ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र से की 4 घंटे पूछताछ, सीएम योगी के दौरे से चंपत राय को किया गया दूर

अयोध्या (आरएनआई) उत्तर प्रदेश के अयोध्या जनपद स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की दान राशि में हुई करोड़ों रुपये की हेरफेर और कथित महा-गबन मामले में शासन द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की तफ्तीश चौथे दिन और अधिक आक्रामक व निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। लगातार चार दिनों से अयोध्या धाम में डेरा डाले एसआईटी की टीम ने 18 जून (गुरुवार) को करीब 10 घंटे तक मंदिर परिसर में रहकर मैराथन जांच की। इस दौरान जांच टीम ने ट्रस्ट के बेहद रसूखदार सदस्य और कद्दावर ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र को आमने-सामने बिठाकर करीब 4 घंटे तक कड़ी पूछताछ की। इसके साथ ही, एक बेहद अप्रत्याशित और बड़े प्रशासनिक घटनाक्रम के तहत, आज अयोध्या पहुंच रहे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आधिकारिक प्रोटोकॉल से राम मंदिर के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति और ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को पूरी तरह दूर रहने का विधिक निर्देश जारी किया गया है।

इस हाई-प्रोफाइल वित्तीय घोटाले की चौथे दिन की विधिक प्रोग्रेस और जांच के मुख्य बिंदुओं पर सिलसिलेवार नजर डालें:

डॉ. अनिल मिश्र से नियुक्तियों पर सवाल और टिन्नू यादव से क्रॉस चेकिंग-

एसआईटी के आला अधिकारियों ने डॉ. अनिल मिश्र से पूछताछ के दौरान राम मंदिर में आने वाले दान की रकम की गणना (काउंटिंग), तिजोरी के रख-रखाव और इस भारी-भरकम राशि को बैंक में सुरक्षित जमा करने की पूरी विधिक प्रक्रिया को विस्तार से समझा। टीम ने इस वित्तीय चक्र में सीधे तौर पर डॉ. मिश्र की निजी भूमिका और प्रशासनिक जिम्मेदारी को लेकर कई तीखे सवाल दागे। इसके अतिरिक्त, दान राशि की गणना से सीधे जुड़े अनुकल्प मिश्र और लवकुश मिश्र आदि कर्मचारियों की नियुक्ति किस विधिक प्रक्रिया के तहत की गई थी और इन नियुक्तियों में डॉ. अनिल मिश्र की क्या भूमिका या सिफारिश थी, इस पर भी गहन पड़ताल हुई। डॉ. अनिल मिश्र के बयान दर्ज करने के तत्काल बाद एसआईटी ने मुख्य संदिग्ध रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव को दोबारा तलब किया। टीम ने करीब डेढ़ घंटे तक टिन्नू से पूछताछ की और डॉ. मिश्र द्वारा दिए गए जवाबों का टिन्नू के बयानों से मिलान (क्रॉस चेक) कर विधिक विसंगतियों को परखा।

रामलला को समर्पित महिला के आभूषणों की तलाश, फूलकांत मिश्र संदेह के घेरे में-

वित्तीय गबन की इस जांच का दायरा अब केवल नकद राशि तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भगवान को चढ़ाए गए सोने-चांदी के आभूषणों तक पहुंच गया है। एसआईटी ने रामलला को चढ़ने वाली बहुमूल्य धातुओं की जिम्मेदारी संभालने वाले सहयोगी आशीष अग्निहोत्री से कड़ी पूछताछ की। जांच टीम विशेष रूप से सालभर पहले वायरल हुए उस वीडियो के आभूषणों का विधिक रिकॉर्ड खंगाल रही है, जिसमें एक महिला श्रद्धालु ने अपनी अगाध आस्था के चलते अपने शरीर के सारे सोने के गहने उतारकर रामलला के चरणों में अर्पित कर दिए थे। इन बेशकीमती गहनों के रख-रखाव में शामिल और महासचिव चंपत राय के बेहद करीबी सहयोगी के रूप में सेवा देने वाले कर्मचारी फूलकांत मिश्र भी अब एसआईटी के संदेह के घेरे में आ गए हैं, जिनसे किसी भी समय विधिक पूछताछ की जा सकती है।

₹20 हजार से कम सैलरी और करोड़ों के आलीशान मकानों का फोरेंसिक ऑडिट-

एसआईटी की वित्तीय शाखा (Economic Wing) का मुख्य फोकस अब उन कर्मचारियों की निजी संपत्तियों पर है जो चढ़ावे की गिनती की विधिक प्रक्रिया में सीधे तौर पर शामिल थे। जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि इन कर्मचारियों का आधिकारिक मासिक वेतन ₹20,000 से भी कम है, इसके बावजूद इनमें से कई कर्मचारियों ने पिछले कुछ महीनों के भीतर ही अयोध्या और आसपास के क्षेत्रों में लाखों-करोड़ों रुपये मूल्य के आलीशान मकान और बेशकीमती जमीनें खरीदी हैं। एसआईटी इन सभी संदिग्ध कर्मचारियों की बेनामी संपत्तियों और राम मंदिर से जुड़े निर्माण ठेकों में मनमाने ढंग से हुए कमीशन और अवैध लेन-देन के आरोपों की कड़ाई से जांच कर रही है।

सीएम योगी का आज अयोध्या दौरा: चंपत राय के प्रवेश पर विधिक रोक-

राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद के चरम पर होने के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज शुक्रवार को अयोध्या धाम पहुंच रहे हैं, जहां वे रामलला के दरबार में दर्शन-पूजन करेंगे। इस वीवीआईपी दौरे के बीच सबसे बड़ी खबर यह है कि मुख्यमंत्री पूरे कार्यक्रम के दौरान मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से पूरी तरह दूरी बनाकर रखेंगे। सूत्रों के मुताबिक, जिला प्रशासन द्वारा जारी किए गए मुख्यमंत्री के आधिकारिक प्रोटोकॉल लेटर के बिंदु संख्या-29 में बकायदा लिखित तौर पर चंपत राय से यह विशेष अनुरोध किया गया है कि वे मुख्यमंत्री के राम मंदिर कार्यक्रम के दौरान स्वयं उपस्थित रहने के बजाय किसी अन्य व्यक्ति को अपना विधिक प्रतिनिधि नामित करें और इसकी लिखित सूचना ड्यूटी मजिस्ट्रेट को दें। राम मंदिर के इतिहास में यह पहली बार हो रहा है जब पूरे मंदिर प्रबंधन के सर्वेसर्वा और सबसे पावरफुल शख्स चंपत राय को किसी वीवीआईपी कार्यक्रम से प्रशासनिक रूप से बाहर रखा गया है, जिसे एसआईटी की जांच रिपोर्ट से जोड़कर देखा जा रहा है।

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