मिनाब स्कूल धमाका: जांच में टॉमहॉक मिसाइल के इस्तेमाल के संकेत, ट्रंप और ईरान आमने-सामने
तेहरान। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच ईरान के मिनाब शहर में हुए भीषण स्कूल धमाके को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। विशेषज्ञों की शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि हमले में संभवतः टॉमहॉक क्रूज मिसाइल का इस्तेमाल किया गया था। इस घटना में 165 से अधिक बच्चियों की मौत हो गई थी। मामले को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
यह घटना 28 फरवरी को ईरान के दक्षिणी मिनाब शहर में हुई थी, जो होर्मोज्गान प्रांत में स्थित है। यहां एक स्कूल के पास जोरदार विस्फोट हुआ था। बताया गया कि यह स्कूल इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) के एक सैन्य अड्डे के बेहद करीब स्थित है। धमाका इतना शक्तिशाली था कि आसपास का इलाका पूरी तरह दहल गया और बड़ी संख्या में स्कूली बच्चियों की जान चली गई।
इस घटना की जांच कर रही ओपन-सोर्स रिसर्च संस्था बेलिंगकैट ने एक वीडियो का विश्लेषण किया है। यह वीडियो हमले वाले दिन रिकॉर्ड किया गया था और बाद में मेहर समाचार एजेंसी द्वारा जारी किया गया। वीडियो में एक मिसाइल को इमारत से टकराते हुए देखा जा सकता है, जिसके बाद आसमान में काला धुआं उठता नजर आता है। विशेषज्ञों का कहना है कि वीडियो में दिखाई देने वाली मिसाइल का स्वरूप टॉमहॉक क्रूज मिसाइल से मिलता-जुलता प्रतीत होता है।
इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस घटना को लेकर अलग दावा किया है। ट्रंप ने कहा कि संभव है ईरान ने खुद ही यह हमला किया हो। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के पास भी टॉमहॉक जैसी मिसाइल हो सकती है, हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अभी तक इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि ईरान के पास ऐसी मिसाइल मौजूद है। यह मिसाइल अमेरिकी रक्षा कंपनी रेथियॉन बनाती है और इसे केवल कुछ सहयोगी देशों को ही उपलब्ध कराया जाता है।
समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस ने भी वीडियो की लोकेशन की जांच की और पाया कि इसे स्कूल के पास ही रिकॉर्ड किया गया था। सैटेलाइट तस्वीरों में दिखाई दे रहे बिजली के खंभे, इमारतें और वाहन वीडियो में दिख रही जगह से मेल खाते हैं। जांचकर्ताओं का कहना है कि मिसाइल की बनावट और उड़ान का तरीका टॉमहॉक क्रूज मिसाइल जैसा प्रतीत होता है, जिसका इस्तेमाल आमतौर पर अमेरिकी सेना करती है।
अमेरिकी सेना की कमान संयुक्त राज्य अमेरिका मध्य कमान (सेंटकॉम) पहले ही स्वीकार कर चुकी है कि उसने इस संघर्ष के दौरान टॉमहॉक मिसाइलों का इस्तेमाल किया है। इसके अलावा अमेरिकी विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन के साथ तैनात युद्धपोत यूएसएस स्प्रुअंस से 28 फरवरी को टॉमहॉक मिसाइल दागे जाने की तस्वीरें भी जारी की गई थीं। एक अमेरिकी अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि यह हमला संभवतः अमेरिका द्वारा किया गया हो सकता है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूल के पास आईआरजीसी का सैन्य अड्डा और नौसेना की बैरक होने के कारण यह इलाका संभावित सैन्य लक्ष्य हो सकता था। वहीं इस्राइल ने साफ किया है कि उसने यह हमला नहीं किया और उसके हमले आमतौर पर ईरान के उत्तरी और मध्य हिस्सों में हुए हैं।
अंतरराष्ट्रीय कानून के विशेषज्ञों ने इस घटना पर गंभीर चिंता जताई है। **ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की एक विशेषज्ञ के अनुसार यदि हमला गलती से भी किसी स्कूल पर हुआ है, तो यह अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन माना जा सकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी सैन्य कार्रवाई से पहले यह सुनिश्चित करना आवश्यक होता है कि लक्ष्य वास्तव में सैन्य है या नहीं।
हालांकि युद्ध की स्थिति के कारण अभी तक किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी को मौके पर पहुंचने का अवसर नहीं मिला है। मिसाइल के टुकड़ों की तस्वीरें भी सामने नहीं आई हैं, जिससे घटना की पूरी सच्चाई स्पष्ट होना अभी बाकी है। फिर भी सामने आए वीडियो और सैटेलाइट तस्वीरों के बाद इस हमले में अमेरिका की संभावित भूमिका को लेकर सवाल और गहरे हो गए हैं।
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