मानसून सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक में हंगामा, बागी सांसदों की मौजूदगी पर विपक्ष का वॉकआउट
संसद के मानसून सत्र से पहले आयोजित सर्वदलीय बैठक में बागी सांसदों की मौजूदगी को लेकर विवाद खड़ा हो गया। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) समेत कई विपक्षी दलों ने इस पर कड़ा विरोध जताते हुए बैठक से वॉकआउट कर दिया। संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हो रहा है।
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया कि एक गैर-मान्यता प्राप्त समूह के सांसदों को बैठक में शामिल किया गया, जबकि उनके दल के विलय या अलग पहचान को अब तक लोकसभा अध्यक्ष की मंजूरी नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि टेबल ऑफिस की सूची में अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस की संख्या 28 सांसद ही दिखाई गई है, जबकि कथित 20 बागी सांसदों के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाएं अभी भी लंबित हैं।
महुआ मोइत्रा ने कहा कि 91वें संविधान संशोधन के बाद अलग गुट के गठन का प्रावधान नहीं है। ऐसे में इन सांसदों को सर्वदलीय बैठक में आमंत्रित करने का आधार स्पष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि इसी विरोध के चलते कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, द्रमुक, झारखंड मुक्ति मोर्चा, आम आदमी पार्टी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, वाम दलों और शिवसेना (यूबीटी) सहित पूरे विपक्ष ने बैठक का बहिष्कार किया।
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि अंतिम संवैधानिक निर्णय से पहले किसी समूह को मान्यता देना संविधान की भावना के विपरीत है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने संविधान की रक्षा के लिए बैठक से वॉकआउट किया।
शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत ने भी बागी सांसदों को दी गई मान्यता पर सवाल उठाते हुए कहा कि कानून में ऐसे प्रावधान का कोई आधार नहीं है। उन्होंने कहा कि इसी कारण उनकी पार्टी ने भी बैठक का बहिष्कार किया।
सर्वदलीय बैठक का उद्देश्य मानसून सत्र के दौरान विभिन्न दलों के साथ समन्वय और सदन की कार्यवाही को सुचारु रूप से चलाने पर चर्चा करना था, लेकिन बागी सांसदों के मुद्दे पर विपक्ष के विरोध के कारण बैठक की शुरुआत ही विवादों के बीच हुई।
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