महर्षि पराशर का अद्भुत ज्योतिष ज्ञान: सहस्रों वर्ष पहले ही ग्रहों का वर्गीकरण

Friday, October 3, 2025 - 10:47
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महर्षि पराशर का अद्भुत ज्योतिष ज्ञान: सहस्रों वर्ष पहले ही ग्रहों का वर्गीकरण

नई दिल्ली (आरएनआई) भारतीय ज्योतिष के आदिपुरुष महर्षि पराशर का नाम आज भी वैज्ञानिक और आध्यात्मिक जगत में उतनी ही श्रद्धा से लिया जाता है। हाल ही में शोधकर्ताओं ने उनके "बृहत्पाराशर होरा शास्त्र" और अन्य ग्रंथों में छिपे रहस्यों पर नई रोशनी डाली है।

महर्षि पराशर, जो वेदव्यास के पिता और वशिष्ठ परंपरा के महान ऋषि माने जाते हैं, ने हजारों साल पहले ही ग्रहों को चार श्रेणियों में विभाजित कर दिया था – प्रकाशित ग्रह, छाया ग्रह, अप्रकाशित ग्रह और अल्पप्रकाशित ग्रह।

प्रकाशित ग्रह – सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि। ये सीधे जीवन पर असर डालते हैं और ऋतु-परिवर्तन से लेकर ऊर्जा तक सब कुछ नियंत्रित करते हैं।

छाया ग्रह – राहु और केतु। जिन्हें नंगी आंखों से नहीं देखा जा सकता, लेकिन इनके प्रभाव से जीवन में अचानक बदलाव और ग्रहण जैसी परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं।

अप्रकाशित ग्रह – धूम, व्यतिपात, परिवेष, इन्द्रचाप और शिखी। इनका प्रभाव केवल तब दिखता है जब ये सूर्य, चंद्र या लग्न के समीप हों।

अल्पप्रकाशित ग्रह – अरुण (Uranus), वरुण (Neptune) और यम (Pluto)। पश्चिमी विज्ञान ने इन्हें हाल ही में खोजा, लेकिन भारतीय ऋषि इन्हें सहस्राब्दियों पहले ही पहचान चुके थे।

उपग्रह प्रभाव – गुलिक और मांदि। पराशर के अनुसार, ये व्यक्तिगत जीवन से अधिक सामूहिक घटनाओं – जैसे महामारी, युद्ध और प्राकृतिक आपदाओं – पर असर डालते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि महर्षि पराशर का ज्ञान यह साबित करता है कि प्राचीन भारतीय ऋषि केवल खगोलविद ही नहीं थे, बल्कि ब्रह्मांडीय चेतना को समझने वाले महाज्ञानी थे।

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