महंगी दवाओं के खिलाफ प्रदर्शन, “एक देश–एक दवा मूल्य” कानून की मांग
बरेली (आरएनआई) देश में दवाओं की बढ़ती कीमतों और उनके सामाजिक प्रभाव को लेकर गरीब शक्ति दल ने आज संगठन प्रमुख मनोज विकट के नेतृत्व में अपर जिलाधिकारी (एसीएम) को ज्ञापन सौंपा। संगठन ने केंद्र सरकार से “एक देश – एक दवा बिक्री मूल्य” का कानून लागू करने की मांग की है।
ज्ञापन में कहा गया कि भारत में ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940, ड्रग्स रूल्स, 1945 तथा फार्मेसी एक्ट, 1948 के बावजूद कई दवा निर्माण कंपनियां एक ही दवा को अलग-अलग कीमतों पर बेच रही हैं, जिससे आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
संगठन प्रमुख मनोज विकट ने कहा कि देश के कई राज्यों — तेलंगाना, महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु और हिमाचल प्रदेश — में स्थित बड़ी दवा कंपनियों द्वारा निर्मित दवाएं अत्यधिक महंगी हैं। इन दवाओं की ऊंची कीमतों के कारण गरीब और मध्यम वर्ग के मरीज निजी अस्पतालों में आवश्यक दवाएं नहीं खरीद पाते, जिससे इलाज प्रभावित होता है और कई मामलों में मरीजों की जान तक चली जाती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि दवाओं की कीमतों में असमानता और मनमानी मूल्य निर्धारण नीति के कारण समाज में आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। संगठन का कहना है कि दवा की एक ही संरचना और गुणवत्ता होने के बावजूद अलग-अलग ब्रांड नाम पर अलग कीमतें तय की जा रही हैं, जो उपभोक्ताओं के साथ अन्याय है।
गरीब शक्ति दल ने मांग की कि महंगी दवाओं के निर्माण और बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण के लिए कड़े कानून बनाए जाएं तथा देशभर में “एक देश – एक दवा बिक्री मूल्य” नीति लागू की जाए, ताकि हर नागरिक को सस्ती और समान कीमत पर दवाएं उपलब्ध हो सकें।
संगठन ने चेतावनी दी कि यदि दवा मूल्य नियंत्रण को लेकर शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में जनआंदोलन किया जाएगा।
इस दौरान ज्ञापन सौंपने वालों में संजय सक्सेना (एडवोकेट), गिरीश चंद्र सक्सेना, मोहम्मद नासिर हुसैन, मोहम्मद रफ़ी, रेनू रावत और मुर्शीद शामिल रहे।
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