बीजेपी का बड़ा दांव: दतिया से नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटा, आशुतोष तिवारी पर भरोसा
राजनीति में बदलाव कब और किस करवट बैठ जाए, कहना मुश्किल है। मध्य प्रदेश की राजनीति के 'चाणक्य' कहे जाने वाले और बीजेपी के सबसे कद्दावर चेहरों में शुमार डॉ. नरोत्तम मिश्रा को लेकर बीजेपी ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिसने पूरे सियासी गलियारे में हलचल मचा दी है।
बीजेपी ने दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए अपनी रणनीति को पूरी तरह बदलते हुए 6 बार के विधायक और पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काट दिया है। उनकी जगह संगठन में सक्रिय रहने वाले नेता आशुतोष तिवारी को चुनावी मैदान में उतारा गया है।
2023 के मुख्य विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के राजेंद्र भारती से मिली करीबी हार के बाद, शायद बीजेपी यहाँ एक नए राजनीतिक समीकरण को जन्म देना चाहती थी।
नरोत्तम मिश्रा का मध्य प्रदेश बीजेपी में क्या कद रहा है, इसे इस बात से समझा जा सकता है कि एक दौर में वे 'पावर सेंटर' हुआ करते थे। सिर्फ दतिया ही नहीं, बल्कि प्रदेश की दूसरी विधानसभा सीटों से टिकट की चाह रखने वाले बड़े-बड़े नेता नरोत्तम मिश्रा के बंगले के चक्कर काटते थे और दिल्ली-भोपाल तक सोर्स लगवाते थे। आज उनका खुद का टिकट कटना राजनीति की अनिश्चितता को बयां करता है।
नरोत्तम मिश्रा के सफर की शुरुआत 1990 में डबरा विधानसभा से पहली बार विधायक बनने से हुई, 2008 में परिसीमन के बाद दतिया आए और यहाँ से लगातार 3 बार जीत दर्ज की। प्रदेश सरकार में गृह, कानून, जेल और संसदीय कार्य जैसे सबसे भारी-भरकम विभागों की जिम्मेदारी संभाली।
बीजेपी का यह फैसला साफ संकेत देता है कि पार्टी अब नए और सांगठनिक चेहरों को आगे बढ़ाने की नीति पर चल रही है। आशुतोष तिवारी के लिए यह एक बहुत बड़ा मौका है, तो वहीं नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों के लिए यह खबर किसी बड़े झटके से कम नहीं है।
आपकी क्या राय है? क्या बीजेपी का दतिया में चेहरा बदलना सही फैसला है? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर दें!
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