गुना स्टेशन पर आवारा पशुओं का आतंक, यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़!

Sunday, September 6, 2026 - 19:16
Updated: 6 days ago
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गुना स्टेशन पर आवारा पशुओं का आतंक, यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़!

गुना रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुरक्षा को लेकर रेल प्रशासन की गंभीर लापरवाही एक बार फिर सवालों के घेरे में है। स्टेशन परिसर में सांड, आवारा पशु, सूअर और कुत्तों की लगातार मौजूदगी यात्रियों के लिए मुसीबत बनी हुई है। हालात ऐसे हैं कि यात्री ट्रेन का इंतजार करें या अचानक सामने आ जाने वाले आवारा पशुओं से अपनी जान और सामान बचाएं—यह चिंता हर समय बनी रहती है।

बताया जाता है कि पूर्व में XZRUCC सदस्य सुनील आचार्य द्वारा भी गुना स्टेशन पर सांड और आवारा पशुओं के कारण यात्रियों के साथ होने वाली घटनाओं तथा हाथापाई की जानकारी संबंधित अधिकारी को दी गई थी। उस समय अधिकारी द्वारा स्टेशन के दोनों छोर पर जाली लगाने तथा काऊ कैटल की व्यवस्था करने की बात कहकर मामले को टाल दिया गया था। लेकिन विडंबना यह है कि उस आश्वासन को दिए वर्षों से अधिक समय गुजर चुका है और समस्या जस की तस बनी हुई है।

कब जागेगा रेल प्रशासन?

गुना स्टेशन पर यात्रियों के बीच हर समय यह डर बना रहता है कि न जाने कब कोई सांड या आवारा पशु अचानक सामने आकर हमला कर दे। विशेष रूप से बुजुर्गों, महिलाओं और छोटे बच्चों के लिए यह स्थिति और भी चिंताजनक है।

हाल ही में सामने आई एक तस्वीर ने स्टेशन की व्यवस्था की पोल खोल दी। रात के समय यात्री ट्रेन का इंतजार कर रहे थे, तभी एक सांड ने स्टेशन परिसर में रखे डस्टबिन को गिराकर उसमें मौजूद पूरा कचरा इधर-उधर फैला दिया। सवाल यह है कि यदि यही सांड किसी यात्री, बच्चे या बुजुर्ग पर हमला कर देता तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होती?

क्या बड़ी घटना का इंतजार है?

रेल प्रशासन से सीधा सवाल है—क्या किसी यात्री के गंभीर रूप से घायल होने के बाद ही जिम्मेदार अधिकारियों की नींद खुलेगी?

जब पहले ही समस्या की जानकारी अधिकारियों को दी जा चुकी थी और सुरक्षा व्यवस्था के लिए जाली लगाने जैसे कदम उठाने का आश्वासन दिया गया था, तो वर्षों बाद भी उस पर अमल क्यों नहीं हुआ? स्टेशन परिसर में आवारा पशुओं का बेरोकटोक प्रवेश आखिर किसकी लापरवाही का परिणाम है?

रेलवे यात्रियों से टिकट लेकर उन्हें सुरक्षित यात्रा की सुविधा देने का दावा करता है। लेकिन यदि स्टेशन परिसर में ही यात्री सांडों, सूअरों और आवारा कुत्तों से भयभीत होकर खड़े रहें, तो फिर यात्री सुरक्षा के दावों की हकीकत क्या है?

क्या यात्रियों को अब खुद करनी होगी सुरक्षा?

स्थिति पर व्यंग्यात्मक लेकिन गंभीर सवाल यह भी है कि क्या अब रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की सुरक्षा के नियम बदल गए हैं? क्या यात्रियों को ट्रेन पकड़ने के साथ-साथ सांड और आवारा पशुओं से बचने के लिए लाठी-डंडे भी साथ लेकर चलना पड़ेगा?

गुना स्टेशन पर यह समस्या कोई एक दिन की नहीं है। लंबे समय से बनी इस अव्यवस्था के बावजूद यदि रेल प्रशासन के आला अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं, तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि यात्रियों की सुरक्षा के प्रति गंभीर उदासीनता का मामला है।

अब आवश्यकता इस बात की है कि रेल प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मामले को गंभीरता से लेते हुए गुना स्टेशन का निरीक्षण करें, स्टेशन के दोनों छोर पर प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था करें, आवारा पशुओं की आवाजाही रोकने के लिए स्थायी इंतजाम करें और डस्टबिन व कचरा प्रबंधन की भी उचित व्यवस्था सुनिश्चित करें।

क्योंकि सवाल केवल स्टेशन की साफ-सफाई का नहीं है—सवाल यात्रियों की जान और सुरक्षा का है। और किसी बड़ी दुर्घटना के बाद जिम्मेदारी तय करने से बेहतर है कि रेल प्रशासन उससे पहले जाग जाए।

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