दिल्ली हाईकोर्ट ने जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़ी जनहित याचिका खारिज की, अन्य कानूनी विकल्प खुले
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए विरोध प्रदर्शन से संबंधित जनहित याचिका (पीआईएल) वापस लेने के आधार पर खारिज कर दी। मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाकर्ता को उचित कानूनी उपाय अपनाने की स्वतंत्रता प्रदान की।
याचिका में नीट-यूजी 2026 परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरोध में हुए छात्र आंदोलन का उल्लेख किया गया था। इसमें संसद की ओर मार्च, सड़क जाम, तोड़फोड़, पुलिसकर्मियों पर हमले और पत्रकारों, विशेषकर महिला पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार जैसी घटनाओं की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) या किसी अन्य विशेष एजेंसी से कराने की मांग की गई थी।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि किस एजेंसी से जांच कराई जानी है, यह संबंधित अधिकारियों का निर्णय होता है। उन्होंने कहा कि इस मामले से जुड़े अन्य प्रकरणों पर भी अलग-अलग याचिकाएं लंबित हैं और उन्हें साथ में देखा जा सकता है।
अदालत ने कहा कि एनआईए जांच से जुड़े प्रावधान अलग हैं और प्राथमिक जांच पूरी होने तथा उससे असंतोष की स्थिति में ही आगे की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। इसके बाद याचिकाकर्ता ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए याचिका खारिज कर दी।
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