सुप्रीम कोर्ट के दो बड़े फैसले: कानूनी शिक्षा की अवधि पर विशेषज्ञ निकाय की जरूरत, अयोग्य शिक्षकों की नियुक्ति पर रोक
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कानूनी शिक्षा की अवधि और शिक्षकों की न्यूनतम योग्यता से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में अहम टिप्पणियां कीं। एक मामले में अदालत ने कानून की पढ़ाई की अवधि तय करने के लिए विशेषज्ञ निकाय की जरूरत बताई, जबकि दूसरे मामले में निर्धारित योग्यता के बिना शिक्षकों की नियुक्ति पर रोक लगा दी।
कानून की पढ़ाई कितने साल की हो, विशेषज्ञ तय करें
एलएलबी और एलएलएम पाठ्यक्रम की अवधि तथा कानूनी शिक्षा के पाठ्यक्रम की समीक्षा की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने कहा कि कानूनी शिक्षा के लिए भी विशेषज्ञ निकाय होना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि कानून की पढ़ाई की अवधि तय करना गंभीर विषय है और इसमें विशेषज्ञों की राय जरूरी है।
अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय की याचिका में दावा किया गया है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम को बढ़ावा देती है, जबकि एलएलबी और एलएलएम के मौजूदा पाठ्यक्रम तथा अवधि में अपेक्षित बदलाव नहीं किए गए हैं। याचिका में पांच वर्षीय बीए-एलएलबी और बीबीए-एलएलबी पाठ्यक्रम की अवधि को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं और कहा गया है कि इससे छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।
अयोग्य शिक्षकों की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
दूसरे मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों और कॉलेजों में न्यूनतम निर्धारित योग्यता पूरी नहीं करने वाले शिक्षकों की नियुक्ति या समायोजन पर रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में अयोग्य शिक्षकों की नियुक्ति का असर आने वाली पीढ़ियों पर पड़ सकता है।
जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने यह आदेश असम के शिक्षण संस्थानों से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान दिया। याचिका में आरोप था कि बिना निष्पक्ष और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के अयोग्य लोगों को सरकारी सेवा में शामिल किया जा रहा है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद अधिनियम और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम के तहत निर्धारित न्यूनतम योग्यता के बिना किसी व्यक्ति को शिक्षक नियुक्त नहीं किया जा सकता। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने सवाल किया कि “अयोग्य लोगों को नियुक्त क्यों कर रहे हैं?”
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