अमेरिकी नागरिक पर यूएपीए नहीं लगाने से कांग्रेस ने सरकार को घेरा, पूछा- क्या अमेरिकी दबाव में लिया गया फैसला?
नई दिल्ली। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की ओर से अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैन डाइक समेत सात विदेशी नागरिकों के खिलाफ दाखिल आरोपपत्र को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने पूछा है कि आतंकवादी साजिश के आरोपों के बावजूद अमेरिकी नागरिक पर गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत आरोप क्यों नहीं लगाए गए।
एनआईए ने मंगलवार को विशेष न्यायाधीश प्रशांत शर्मा की अदालत में सात विदेशी नागरिकों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। सभी पर भारत में अवैध तरीके से प्रवेश करने, रहने और घूमने के आरोप लगाए गए हैं। एनआईए ने इन्हें आतंकी साजिश से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों के भारत में सक्रिय जातीय सशस्त्र समूहों से संबंध होने के आरोपों की भी जांच की गई।
आरोपपत्र में सातों आरोपियों के खिलाफ आव्रजन और विदेशी अधिनियम की धारा 21 और 23 के तहत आरोप लगाए गए हैं। एनआईए ने अदालत को बताया कि यूएपीए के तहत अपराध से संबंधित पूरी और सही जानकारी हासिल करने तथा उसकी पुष्टि करने के लिए उसे अभी और समय की जरूरत है। इसी वजह से आरोपपत्र में फिलहाल यूएपीए की धाराएं नहीं जोड़ी गई हैं।
कांग्रेस ने सरकार से पूछे तीखे सवाल
कांग्रेस महासचिव और संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने इस मामले को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या एनआईए ने विस्तृत जांच के बाद अमेरिकी नागरिक पर आतंक से जुड़े आरोप नहीं लगाए या फिर अमेरिकी अधिकारियों के कहने पर मोदी सरकार ने जांच एजेंसी पर ऐसा करने का दबाव बनाया।
जयराम रमेश ने यह भी सवाल किया कि अगर यह फैसला अमेरिकी दबाव में लिया गया है तो इसके बदले भारत को क्या मिलने की उम्मीद है। कांग्रेस नेता ने पूरे मामले को लेकर सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की और आरोप लगाया कि यह मामला अमेरिकी दबाव के आगे झुकने जैसा दिखाई देता है।
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