सुप्रीम कोर्ट सख्त, ड्रग्स मामलों के लिए छह हफ्ते में बनें 419 नई विशेष अदालतें
नई दिल्ली। देश में मादक पदार्थों से जुड़े मामलों में लगातार हो रही बढ़ोतरी और लंबित मुकदमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने केंद्र, राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को एनडीपीएस अधिनियम के तहत मामलों की सुनवाई के लिए आवश्यक विशेष अदालतों का जल्द गठन करने का निर्देश दिया है।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ को अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि एनडीपीएस मामलों के प्रभावी निपटारे के लिए देशभर में कुल 449 विशेष अदालतों की आवश्यकता है। इनमें से 176 अदालतें पहले से कार्यरत हैं।
पीठ ने कहा कि एनडीपीएस अधिनियम के तहत मामलों की मौजूदा लंबित स्थिति और मामलों में हुई चिंताजनक बढ़ोतरी को देखते हुए शेष 419 अदालतों का जल्द गठन न्याय के हित में जरूरी है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को विशेष अदालतों के गठन के लिए जरूरी कदम उठाने और आवश्यक बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने पूरी प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर छह सप्ताह के भीतर पूरा करने को कहा। पीठ इस मामले की सुनवाई 'इन री: क्रिएशन ऑफ स्पेशल एक्सक्लूसिव कोर्ट्स' शीर्षक से स्वत: संज्ञान लेकर शुरू किए गए मामले में कर रही थी।
एनआईए मामलों के लिए आठ नई विशेष अदालतें गठित
सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से बताया गया कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा जांच किए जाने वाले मामलों की सुनवाई के लिए देशभर में आठ नई विशेष अदालतों का गठन किया गया है। इसके साथ एनआईए मामलों के लिए विशेष अदालतों की कुल संख्या बढ़कर 22 हो गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले 8 मई को निर्देश दिया था कि एनआईए द्वारा जांच किए गए मामलों में लंबित 10 से 15 मुकदमों के लिए कम से कम एक विशेष अदालत गठित की जाए। पीठ ने कहा कि सरकारों और उच्च न्यायालयों के सहयोग से इस दिशा में अदालत के आदेश का उद्देश्य काफी हद तक पूरा हुआ है।
विभिन्न राज्यों और उच्च न्यायालयों की ओर से पेश वकीलों ने भी अदालत को बताया कि एनआईए मामलों की संख्या और आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त विशेष अदालतों की व्यवस्था की जा रही है।
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