सुप्रीम कोर्ट में 5 अक्टूबर को सुनवाई, क्या अकेले फैसला ले सकते हैं सीईसी ज्ञानेश कुमार? जानिए पूरा विवाद
नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की शक्तियों और चुनाव आयोग की सामूहिक निर्णय प्रक्रिया से जुड़ी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार, 5 अक्टूबर को सुनवाई होगी। याचिका में सवाल उठाया गया है कि क्या संविधान के तहत चुनाव आयोग को दी गई शक्तियों का इस्तेमाल मुख्य चुनाव आयुक्त अकेले कर सकते हैं या इसके लिए आयोग के सभी सदस्यों की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार भागीदारी जरूरी है।
याचिका में संविधान के अनुच्छेद 324 और मुख्य चुनाव आयुक्त एवं अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023 की धारा 18 का हवाला देते हुए चुनाव आयोग में सामूहिक निर्णय लेने की व्यवस्था का पालन सुनिश्चित करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि आयोग के फैसले पहले सर्वसम्मति से और यदि सहमति नहीं बनती है तो बहुमत के आधार पर लिए जाने चाहिए।
याचिका में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 28 अक्टूबर 2025 से 14 अगस्त 2026 के बीच कम से कम 14 बार कुछ फैसलों और कदमों को लेकर आपत्तियां दर्ज की थीं। इनमें मतदाता सूची से जुड़े मामलों और एसआईआर की प्रक्रिया से संबंधित मुद्दे भी शामिल बताए गए हैं
वहीं, चुनाव आयोग ने इन मतभेदों को निर्णय लेने की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा बताया है। आयोग का कहना है कि उसके पिछले एक साल के फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग ने यह भी कहा है कि चुनाव आयुक्तों के बीच अलग-अलग सुझाव या विचार आना संस्थागत निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा है।
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से चुनाव आयोग के मूल रिकॉर्ड और संबंधित फाइलों की जांच कराने तथा यह स्पष्ट करने की मांग की गई है कि विवादित फैसले निर्धारित सामूहिक प्रक्रिया के तहत लिए गए थे या नहीं। मामले में एसआईआर से जुड़े फैसलों को भी चुनौती दी गई है। हालांकि, इन आरोपों और दावों पर सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला अभी नहीं आया है।
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