एफआईआर से पूर्व नोटिस अनिवार्य हो: डॉ. सुनील कौशिक
किसी संपादक के खिलाफ अचानक एफआईआर दर्ज होना, जांच शुरू होना, पुलिस कार्रवाई का सामना करना या लगातार कानूनी नोटिस मिलना उसके पेशेवर और व्यक्तिगत जीवन पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। ऐसे मामलों में पत्रकारिता से जुड़े कार्यों और संपादकीय निर्णयों को ध्यान में रखते हुए उचित प्रक्रिया का पालन किए जाने की जरूरत है।
एडिटर्स क्लब ऑफ इंडिया की पांचवीं मांग है कि पत्रकारिता संबंधी कार्यों से जुड़े मामलों में, जहां कानून इसकी अनुमति देता हो और मामला तत्काल गिरफ्तारी या किसी गंभीर आपराधिक परिस्थिति से संबंधित न हो, संबंधित संपादक को कारण बताओ नोटिस देकर अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिया जाए।
प्रस्तावित रूप से 50 दिनों की अवधि का उद्देश्य यह है कि संपादक इस दौरान आवश्यक दस्तावेज, स्रोत, रिकॉर्डिंग, प्रकाशन सामग्री और अन्य संबंधित तथ्य प्रस्तुत कर सके। इससे संबंधित पक्ष को अपना पक्ष स्पष्ट करने का अवसर मिलेगा और जांच की प्रक्रिया भी उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ सकेगी।
इस मांग के पीछे मूल उद्देश्य यह है कि पत्रकारिता से जुड़े मामलों में कानूनी प्रक्रिया शुरू होने से पहले, जहां कानून इसकी अनुमति देता हो, संबंधित संपादक को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर मिले।
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