फ्लाईदुबई हादसा: कैप्टन स्मित के पिता बोले- बेटे की सलामती सबसे बड़ी चिंता, उड़ान है उसका जुनून
फ्लाईदुबई की दुबई से तेल अवीव जा रही उड़ान FZ1073 में 30 सितंबर को हुई घटना के बाद भारतीय कैप्टन स्मित मच्छर की बहादुरी की चर्चा हो रही है। विमान में 174 यात्री समेत कुल 180 लोग सवार थे। घटना के दौरान सह-पायलट के साथ हुई झड़प के बीच विमान अचानक तेजी से नीचे उतरने लगा। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कैप्टन स्मित ने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में कामयाबी हासिल की, जिसके बाद यात्रियों और चालक दल के सदस्यों ने स्थिति संभालने में मदद की। विमान को बाद में सऊदी अरब के तबुक में सुरक्षित उतारा गया।
अबूधाबी के अस्पताल में इलाज करा रहे कैप्टन स्मित की हालत स्थिर बताई गई है। उनके सिर और दोनों हाथों में चोटें आई हैं और सिर की सर्जरी भी हुई है। उनके पिता भूपेंद्र मच्छर ने बताया कि घटना की जानकारी मिलने के बाद परिवार के लिए पहली प्रतिक्रिया डर और चिंता की थी। उन्होंने कहा कि उनके लिए बेटे की बहादुरी से ज्यादा उसकी सलामती महत्वपूर्ण है और वह पूरी तरह ठीक होने के बाद ही दोबारा काम पर लौटेंगे।
भूपेंद्र मच्छर ने बताया कि स्मित करीब 17 वर्षों से विमान उड़ा रहे हैं और उड़ान उनके लिए सिर्फ नौकरी नहीं बल्कि जुनून है। उन्होंने कहा कि उनका बेटा अपने काम को लेकर बेहद समर्पित रहा है और अन्य पायलटों का मार्गदर्शन भी करता रहा है। पिता के मुताबिक, संकट के समय स्मित ने अपनी पूरी ताकत लगाकर स्थिति का सामना किया और उनके मन में सबसे बड़ी चिंता विमान में मौजूद यात्रियों की सुरक्षा की थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अस्पताल से वीडियो कॉल के दौरान कैप्टन स्मित से बात की और उनकी बहादुरी की सराहना की। स्मित ने बताया कि घायल होने के बावजूद उन्हें महसूस हो रहा था कि विमान तेजी से नीचे जा रहा है और उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने का फैसला किया। इसके बाद यात्रियों और रिजर्व पायलटों ने विमान को संभालने में मदद की।
इस घटना की जांच जारी है। सह-पायलट की भूमिका और घटना के पीछे की वजहों को लेकर संबंधित अधिकारी जांच कर रहे हैं। फ्लाईदुबई ने भी घटना के कारणों को लेकर जल्दबाजी में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से बचने की अपील की है।
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