सत्य निकेतन हादसा: 6 सितंबर के एमसीडी नोटिस पर उठे सवाल, इमारत को हादसे के दिन ही बताया गया ‘खतरनाक’
नई दिल्ली। दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना के बाद नगर निगम के एक नोटिस को लेकर सवाल उठ रहे हैं। वायरल हो रहे एमसीडी के कथित आदेश में बिल्डिंग नंबर 13 को ‘जर्जर और खतरनाक हालत में’ बताते हुए तीन दिन के भीतर उसे गिराने का निर्देश दिए जाने का दावा किया जा रहा है। नोटिस की तारीख 6 सितंबर 2026 बताई जा रही है।
इस नोटिस को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि इमारत पहले से ही जर्जर और खतरनाक स्थिति में थी, तो उसे हादसे से पहले क्यों नहीं चिन्हित किया गया और समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई। हालांकि, वायरल नोटिस की प्रामाणिकता और यह आदेश हादसे से पहले जारी हुआ था या बाद में, इसकी स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
घटना के बाद सामने आए दस्तावेज को लेकर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि किसी इमारत को खतरनाक घोषित करने और उसे गिराने का आदेश देने की कार्रवाई हादसे के बाद होने के बजाय संभावित खतरे का पता चलते ही की जानी चाहिए थी।
वहीं, हादसे के बाद छात्र संगठनों की सक्रियता भी बढ़ गई है। एबीवीपी समेत विभिन्न संगठनों की ओर से विरोध और कार्रवाई की मांग की जा रही है। चूंकि डीयू छात्रसंघ चुनाव 18 सितंबर को प्रस्तावित हैं, इसलिए राजनीतिक गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, किसी संगठन के प्रदर्शन को केवल चुनावी गतिविधि बताने के लिए उसके उद्देश्य और आधिकारिक पक्ष की पुष्टि जरूरी होगी।
सत्य निकेतन हादसे ने राजधानी में इमारतों की सुरक्षा, निरीक्षण व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अब सबसे अहम सवाल यह है कि इमारत की स्थिति का पहले आकलन क्यों नहीं किया गया और यदि संबंधित अधिकारियों को इसकी जर्जर स्थिति की जानकारी थी, तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को न्याय दिलाने के साथ-साथ जिम्मेदारी तय करना भी जरूरी है। पूरे मामले में एमसीडी के रिकॉर्ड, निरीक्षण रिपोर्ट और नोटिस की वास्तविक तारीख सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लापरवाही कहां हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
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