जलवायु संकट पर यूएन की चेतावनी: 1.5 डिग्री की सीमा पार, पिघलेंगे ग्लेशियर और बढ़ेगा तटीय शहरों पर खतरा
संयुक्त राष्ट्र की नई रिपोर्ट ने बढ़ते जलवायु संकट को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा वैश्विक रुझान जारी रहे तो धरती का तापमान आने वाले समय में औद्योगिक क्रांति से पहले के स्तर की तुलना में कम से कम 1.8 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है। तापमान में यह बढ़ोतरी ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने, समुद्र के जलस्तर में वृद्धि और तटीय क्षेत्रों में रहने वाली आबादी के लिए जोखिम बढ़ा सकती है।
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) की रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया अब 2015 के पेरिस समझौते में तय 1.5 डिग्री सेल्सियस की तापमान सीमा से आगे निकल चुकी है। तापमान में हर अतिरिक्त बढ़ोतरी के साथ चरम मौसम की घटनाओं, ग्लेशियरों के पिघलने, पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान और समुद्र के बढ़ते स्तर का खतरा और गंभीर हो सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, यदि वैश्विक तापमान में वृद्धि 3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचती है, तो वर्ष 2100 तक दुनिया के एक चौथाई से अधिक ग्लेशियरों के पिघलने का खतरा है। इससे समुद्र का जलस्तर करीब 13 सेंटीमीटर तक बढ़ सकता है, जिसका सबसे ज्यादा असर तटीय शहरों और निचले इलाकों पर पड़ने की आशंका है।
जलवायु परिवर्तन का असर केवल समुद्र और बर्फीले क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहेगा। रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि मौजूदा परिस्थितियां जारी रहने पर वर्ष 2050 तक वैश्विक खाद्य उत्पादन में करीब 14 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। इससे खाद्य सुरक्षा और दुनिया की बड़ी आबादी की आजीविका पर भी दबाव बढ़ने की संभावना है।
संयुक्त राष्ट्र ने संकेत दिया है कि तापमान वृद्धि को सीमित करने के लिए वैश्विक स्तर पर ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में तेजी से कमी लाना जरूरी है। वैज्ञानिकों के अनुसार, तापमान जितना अधिक बढ़ेगा, जलवायु संकट से जुड़े जोखिम और नुकसान उतने ही गंभीर होते जाएंगे।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)