सहारनपुर में मस्जिद ध्वस्तीकरण पर उठे सवाल, पत्रकार अंसार इमरान ने प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप
सहारनपुर। सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित पुरानी मस्जिद के ध्वस्तीकरण को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। मस्जिद को अवैध निर्माण बताते हुए की गई कार्रवाई के बाद पत्रकार अंसार इमरान ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि जिस गाटा संख्या 539 की जमीन पर कलेक्ट्रेट, कोषागार और तहसील जैसी सरकारी इमारतें बनी हैं, वह जमीन वालिद खान और याकूब खान द्वारा दान किए जाने की बात सामने आती है। उनका सवाल है कि यदि जमीन का इतिहास इस प्रकार का है तो उसी परिसर में वर्षों पुरानी मस्जिद को अवैध घोषित करने का आधार क्या था।
अंसार इमरान ने दावा किया कि कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद मस्जिद 1911 से पहले की बनी हुई थी। उनके मुताबिक, प्रशासन ने इसे अवैध बताते हुए तड़के भारी पुलिस बल की मौजूदगी में ध्वस्त कराया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान कई बुलडोजरों का इस्तेमाल किया गया और कुछ राजनीतिक नेताओं को नजरबंद किया गया। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
पत्रकार ने प्रशासन की कार्रवाई को लेकर उत्तर प्रदेश में धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों में कथित भेदभाव का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मस्जिद, मदरसों और मजारों से जुड़े मामलों में प्रशासन की कार्रवाई को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
अंसार इमरान ने अपने बयान में उत्तर प्रदेश में धार्मिक आयोजनों और सार्वजनिक गतिविधियों को लेकर प्रशासन के कथित अलग-अलग रवैये का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने संभल में पुलिस थाने के भूमि पूजन, कांवड़ यात्रा के दौरान पुलिस की व्यवस्थाओं और सार्वजनिक स्थानों पर नमाज से जुड़े मामलों का उदाहरण देते हुए प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए।
उन्होंने आरोप लगाया कि एक समुदाय से जुड़े धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई के मामलों में प्रशासन तेजी दिखाता है, जबकि दूसरे धार्मिक आयोजनों में अलग रवैया अपनाया जाता है। इन आरोपों को लेकर संबंधित प्रशासन और सरकार का पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा, ताकि पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट हो सके।
मस्जिद के नीचे मिला कुआं भी बना चर्चा का विषय
मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद मलबा हटाने के दौरान जमीन के नीचे एक कुआं मिलने की जानकारी भी सामने आई है। प्रशासन ने कुएं के पुराने होने की बात कही है। इसी को लेकर कुछ लोगों ने पुरातत्व विभाग से जांच कराने की मांग की है। कुएं की वास्तविक उम्र और ऐतिहासिक महत्व की पुष्टि विशेषज्ञ जांच के बाद ही हो सकेगी।
पूरे मामले में अब कई सवाल सामने हैं। मस्जिद को अवैध घोषित करने का आधार क्या था, जमीन का वास्तविक कानूनी इतिहास क्या है और परिसर में मिले कुएं का ऐतिहासिक महत्व कितना है—इन सभी बिंदुओं पर निष्पक्ष जांच से स्थिति स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल ध्वस्तीकरण को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी है और प्रशासन की ओर से सामने आने वाली विस्तृत जानकारी का इंतजार है।
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