सहारनपुर मस्जिद ध्वस्तीकरण: मलबे के नीचे मिला कुआं, शिकायतकर्ता विकास त्यागी ने पुरातत्व जांच की मांग की
सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलक्ट्रेट परिसर स्थित पुरानी मस्जिद को अवैध निर्माण बताते हुए ध्वस्त किए जाने के बाद मामला और चर्चा में आ गया है। ध्वस्तीकरण के बाद मलबा हटाने के दौरान जमीन के नीचे एक कुआं मिलने से स्थानीय स्तर पर इसे लेकर नए दावे सामने आए हैं। मामले के प्रमुख शिकायतकर्ता विकास त्यागी ने कुएं को लेकर पुरातत्व विभाग से जांच कराने की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, कलक्ट्रेट परिसर में करीब 315 वर्ग मीटर क्षेत्र में बनी इस मस्जिद को शनिवार तड़के ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू की गई थी। कार्रवाई के बाद मलबा हटाने का काम जारी रहा। इसी दौरान टीम को मस्जिद के नीचे एक कुआं मिला। बताया गया है कि कुएं की चौड़ाई करीब एक से सवा मीटर और गहराई लगभग 20 फुट है।
बताया जा रहा है कि कुएं में करीब 20 फुट नीचे मिट्टी जमा है। प्रशासनिक टीम इसे पुराना कुआं मान रही है। कुआं मिलने के बाद किसी तरह की अनहोनी से बचने के लिए उसके आसपास पुलिस बल तैनात किया गया है। एसडीएम सदर सुबोध कुमार ने भी मौके पर कुआं मिलने की पुष्टि की है।
कुएं को लेकर प्रमुख शिकायतकर्ता और बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने अलग दावा किया है। उन्होंने कहा कि संभव है कि वहां पहले कोई पुराना देवस्थान रहा हो और बाद में उस स्थान पर मस्जिद का निर्माण किया गया हो। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
विकास त्यागी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह मामला जांच का विषय है। उन्होंने प्रशासन से पुरातत्व विभाग की टीम को मौके पर बुलाकर कुएं और उसके आसपास की संरचना की जांच कराने की मांग की है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कुआं कितना पुराना है और उसका ऐतिहासिक या पुरातात्विक महत्व क्या है।
वहीं, मस्जिद के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी सामने आई है। विपक्ष की ओर से कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। प्रशासन की ओर से मस्जिद को अवैध बताए जाने के आधार पर की गई कार्रवाई और कुएं से जुड़े दावों की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल कुएं के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी गई है और मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर प्रशासन की नजर है। पुरातत्व विभाग की जांच होती है तो उससे कुएं की उम्र, निर्माण शैली और उसके संभावित ऐतिहासिक महत्व को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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