शंख-घंटियों की गूंज के बीच थोड़ी देर में जन्मेंगे कान्हा, भक्तों को प्राकट्य दर्शन का इंतजार
मथुरा। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर मथुरा समेत देशभर में कान्हा के जन्मोत्सव की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। अब श्रद्धालुओं को मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य का इंतजार है। मंदिरों में शंख और घंटियों की गूंज के बीच जन्मोत्सव मनाया जाएगा। भगवान कृष्ण की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त रात 11 बजकर 57 मिनट से 12 बजकर 42 मिनट तक बताया गया है। इस दौरान करीब 45 मिनट तक विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी।
जन्माष्टमी की रात भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय खीरे के डंठल को काटने की परंपरा भी निभाई जाती है। इसे नाल छेदन कहा जाता है। मान्यता के अनुसार, मध्यरात्रि में कान्हा के जन्म के प्रतीक स्वरूप सिक्के से खीरे का डंठल काटा जाता है। इस परंपरा के साथ मंदिरों में जन्मोत्सव की विधियां पूरी की जाती हैं और श्रद्धालु भगवान के प्राकट्य दर्शन करते हैं।
कान्हा के जन्म के बाद बाल गोपाल का विधि-विधान से अभिषेक और पूजन किया जाता है। इसके बाद उन्हें दूध, माखन, मेवे और विभिन्न प्रकार की मिठाइयों का भोग लगाया जाता है। मंदिरों में आरती और जयकारों के बीच श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन कर आशीर्वाद लेते हैं।
जन्माष्टमी की रात 11 बजकर 57 मिनट से विशेष पूजा शुरू होगी और मध्यरात्रि के बाद करीब 12 बजकर 43 मिनट तक धार्मिक अनुष्ठान जारी रहने की जानकारी दी गई है। जैसे-जैसे जन्म का समय नजदीक आ रहा है, मंदिरों में श्रद्धालुओं का उत्साह बढ़ता जा रहा है। मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य के साथ ही पूरा वातावरण जय श्रीकृष्ण और राधे-राधे के जयघोष से गूंज उठेगा।
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