मथुरा जन्माष्टमी 2026: श्रीकृष्ण जन्मभूमि में आधी रात गूंजे जयकारे, नंदगांव में आज से शुरू होगा अनोखा जन्मोत्सव
मथुरा। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि में भगवान के प्राकट्य का उत्सव पूरे भक्तिभाव के साथ मनाया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर पहुंचे। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और आराध्य का आशीर्वाद लिया।
रात 11 बजे घड़ी की सुई पहुंचते ही श्रीगणेश पूजन और नवग्रह स्थापना के साथ धार्मिक अनुष्ठान शुरू हुए। रात 11.55 बजे तक कमल पुष्प और तुलसीदल से सहस्रार्चन किया गया। इसके बाद 11.59 बजे भागवत भवन स्थित युगल सरकार के पट बंद कर दिए गए। ठीक मध्यरात्रि 12 बजे लीलाधर के चल विग्रह को भागवत भवन लाया गया, जहां रजत कमल पुष्प में विराजमान भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक किया गया। जन्म के इस पावन क्षण के साथ ही मंदिर परिसर जय श्रीकृष्ण के जयघोष से गूंज उठा।

जन्माष्टमी के मौके पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। जन्मभूमि परिसर के लीलामंच पर कलाकारों की धार्मिक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी हुईं। इन प्रस्तुतियों को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटे और देर रात तक परिसर में भक्तिमय माहौल बना रहा।
मथुरा में जहां मध्यरात्रि में कान्हा के जन्म का उल्लास छाता है, वहीं नंदगांव में अगले दिन से नंदोत्सव की धूम शुरू होती है। ब्रज की परंपरा में नंदगांव के उत्सव को विशेष महत्व दिया जाता है। इस बार नंदगांव में 5 सितंबर को जन्माष्टमी और 6 सितंबर को नंदोत्सव मनाया जाएगा। नंदभवन से लेकर गांव की गलियों तक उत्सव का रंग दिखाई देगा।
नंदगांव की जन्माष्टमी की खासियत केवल सजावट और श्रद्धालुओं की भीड़ नहीं, बल्कि सदियों से चली आ रही परंपराएं भी हैं। मान्यता के अनुसार जन्माष्टमी के दिन नंदभवन में मां यशोदा को प्रसूता के समान आहार दिया जाता है। मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के साथ ही मंदिर में उत्सव का माहौल बन जाता है। जन्म के बाद शीत से बचाव के प्रतीक के रूप में सोंठ-धनिया की पंजीरी दी जाती है।

मां यशोदा के मस्तक और पेट पर कपड़ा बांधने की परंपरा भी यहां निभाई जाती है, जिसे छठी तक बांधे रखने की मान्यता है। जन्माष्टमी की रात भजन-संध्या, कृष्ण वंशावली का बखान और ब्रज की प्रसिद्ध ढांढ-ढांढिन लीला श्रद्धालुओं को देर रात तक जोड़े रखती है। वैदिक मंत्रों के बीच होने वाला गुप्त अभिषेक भी नंदगांव के जन्मोत्सव का विशेष आकर्षण है। इस दौरान भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप के विशेष दर्शन होते हैं।
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