नाले चौक, जनता बेहाल… अब नगर निगम के संसाधनों पर ही उठे सवाल

गोपाल चतुर्वेदी

Wednesday, September 2, 2026 - 19:42
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मथुरा। मथुरा-वृंदावन नगर निगम की सफाई व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों के बीच नगर निगम की एक आधिकारिक रिपोर्ट ने व्यवस्था की तैयारियों पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। वार्ड संख्या-30, कृष्णा नगर-2 के पार्षद चंदन आहूजा की ओर से आईजीआरएस के माध्यम से नालों की सफाई को लेकर की गई शिकायत के जवाब में नगर स्वास्थ्य अधिकारी ने 11 अगस्त 2026 को जिलाधिकारी को रिपोर्ट भेजी।

रिपोर्ट में नगर निगम की सफाई नायक तथा सफाई एवं खाद्य निरीक्षक की आख्या का हवाला देते हुए बताया गया कि कृष्णा नगर चौराहे से बिजलीघर तिराहे तक दोनों तरफ के नालों की वर्षा ऋतु से पहले सफाई कराई गई थी। इसके अलावा 30 जुलाई 2026 को वर्षा ऋतु के दौरान भी नालों की सफाई कराए जाने का उल्लेख किया गया है।

हालांकि, रिपोर्ट में नगर निगम के संसाधनों की कमी को लेकर भी अहम बात कही गई है। नगर स्वास्थ्य अधिकारी के मुताबिक, निगम के पास इतने पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं हैं कि वार्ड संख्या-30 में रोजाना कम से कम दो जेसीबी, एक सीवर सेक्शन मशीन और चार ट्रैक्टर-ट्रॉली लगाकर नालों एवं नालियों की नियमित सफाई कराई जा सके।

यहीं से सफाई व्यवस्था को लेकर बड़ा सवाल खड़ा होता है कि आखिर समस्या नालों की है या संसाधनों की। यदि नगर निगम के पास पर्याप्त मशीनरी और संसाधन नहीं हैं तो शहर के प्रमुख नालों की नियमित सफाई और जलनिकासी व्यवस्था कैसे सुनिश्चित होगी? बारिश के दौरान जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था क्या है, यह भी सवालों के घेरे में है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि नालों की सफाई से संबंधित जीपीएस फोटो और दो नागरिकों की लिखित संतुष्टि रिपोर्ट संलग्न की गई है। लेकिन सवाल यह है कि यदि सफाई के कुछ ही समय बाद जलनिकासी बाधित होने की शिकायतें सामने आती हैं, तो केवल तस्वीरों और संतुष्टि प्रमाण पत्र के आधार पर व्यवस्था को पूरी तरह प्रभावी कैसे माना जाए।

पार्षद की शिकायत ने भी इस मामले को अहम बना दिया है। जनप्रतिनिधि का काम अपने क्षेत्र की समस्याओं को अधिकारियों के सामने रखना और उनके समाधान की मांग करना है। ऐसे में यदि जनता जलभराव, गंदे पानी और खराब जलनिकासी की समस्या से परेशान है तो पार्षद द्वारा अधिकारियों से जवाब मांगना स्वाभाविक है। हालांकि, शिकायत की वास्तविक स्थिति और समाधान का आकलन मौके की स्थिति तथा आधिकारिक अभिलेखों के आधार पर ही किया जाना चाहिए।

सफाई व्यवस्था पर खर्च और उपलब्ध संसाधनों को लेकर भी पारदर्शिता जरूरी है। शहर की जनता यह जानना चाहती है कि सफाई व्यवस्था के लिए कितना बजट निर्धारित है, आउटसोर्सिंग पर कितना खर्च किया जा रहा है, नगर निगम के पास कितनी मशीनें और कर्मचारी उपलब्ध हैं और इन संसाधनों के इस्तेमाल की निगरानी किस तरह की जाती है।

कागज पर सफाई, जीपीएस तस्वीरों में सफाई और जमीन पर जलभराव—इन तीनों के बीच वास्तविक स्थिति क्या है, इसका जवाब नगर निगम और जिला प्रशासन को देना होगा। जनता को केवल सफाई की तस्वीर नहीं, बल्कि बारिश के दौरान बेहतर जलनिकासी और जलभराव से राहत चाहिए।

अब सवाल नगर निगम और जिला प्रशासन से है कि यदि नालों की नियमित सफाई के लिए अतिरिक्त मशीनरी और संसाधनों की जरूरत है तो उनकी व्यवस्था समय रहते क्यों नहीं की जाती? बारिश के बाद समस्या सामने आने का इंतजार क्यों किया जाए?

जनता का सवाल सीधा है—उसे जीपीएस फोटो नहीं, साफ नाला चाहिए; संतुष्टि प्रमाण पत्र नहीं, जलभराव से राहत चाहिए। जनप्रतिनिधि अगर जनता की समस्या को लेकर सवाल उठाता है तो असली सवाल यह होना चाहिए कि समस्या का स्थायी समाधान कब होगा।

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