16 साल के मोहित की मामूली विवाद में हत्या, सोशल मीडिया का 'भौकाल' बना मौत की वजह?
गुना शहर में बीती रात मामूली बात पर एक नाबालिग का मर्डर कर दिया गया। सोशल मीडिया पर लाठी डंडे दिखाकर भौकाल खड़ा करने की मानसिकता युवाओं को अपराधी बना रही है। अपराध का अंत बुरा होता है यह जानने के बाद भी कुछ युवाओं को अपराधी बनना है और दहशत फैलाना है। श्रीराम कॉलोनी से लगी साईं सिटी कॉलोनी में एक चक्की के पास हुआ मर्डर इसी मानसिकता का उदाहरण हैं।
घटना की कहानी के मुताबिक 16 वर्षीय मोहित रजक अपने दो दोस्तों के साथ बाइक से घूम रहा था। एक जगह बाइक खड़ी कर मोहित बाइक में एक्सीलेटर दे रहा था। यह बात पास में रहने वाले आरोपी रामजीलाल को नागवार गुजरी। उसने एक्सीलेटर न देने और बाइक हटाने की बात कही। यहीं से तू-तू मैं-मैं गालीगलौज शुरू हुई।
रामजीलाल ने अपनी ऑटो में रखा चाकू निकाला और मोहित को चाकू मारकर उसकी हत्या कर दी। हत्या के बाद आरोपी भाग गया अब पुलिस उसे पकड़ने के लिए छापे मार रही है। मृतक मोहित एक्सीलेंस स्कूल का 12वीं कक्षा का छात्र था। जबकि रामजीलाल छोटे मोटे काम करता था, आजकल वह ऑटो चला रहा था।
इस हत्याकांड में जहां मृतक के परिवार पर दुःखों का पहाड़ टूटा है वहीं आरोपी रामजीलाल और उसका परिवार भी मुश्किलों में हैं। दोषसिद्ध होने पर आरोपी को सजा होगी और पुलिस वकील कोर्ट के खर्चे उसके परिवार के लिए तकलीफ देंगे। न तो बाइक के एक्सीलेटर से कान फूट रहे थे और न तू-तू मैं-मैं से कोई छोटा हो रहा था। लेकिन जरा सी नासमझी ने एक की जान ले ली और दूसरे को हत्यारोपी बना दिया।
इस घटना में अहम सवाल ये है कि रामजीलाल जो खुद ऑटो चलाता था उसे किससे खतरा था जो वह अवैध छुरा लेकर घूमता था? और उसमें इतनी हिम्मत कहां से आई कि एक मामूली बात पर उसने नाबालिग की छुरा मारकर हत्या कर दी। इसे समझने के लिए सोशल मीडिया पर वायरल कुछ फोटो की पड़ताल काफी है।
सोशल मीडिया पर जो फोटो वायरल हैं उसमें रामजीलाल हथियारों का प्रदर्शन कर रहे युवकों के साथ दिखाई पड़ रहा है। दोस्तों के साथ खिंचवाए गए कुछ फोटो में वह हाथ में लाठी डंडे लिए भी दिख रहा है। ये फोटो अलग अलग इंस्टा और एफबी पर वायरल हैं। फोटो में दिखाई दे रहे कुछ तत्व अलग अलग मामलों में जेल में बंद हैं।
सोशल मीडिया पर गैंग जैसा प्रदर्शन कर भौकाल बनाने की शोशेबाज़ी कई युवाओं पर हावी है। ऐसा करने पर कमेंट बॉक्स में दादा की जय हो, भाई का जलवा, दादा की झलक सबसे अलग, सिंघम इस बैक, जैसे जुमले युवाओं को गैर कानूनी कार्य के लिए प्रोत्साहित करते हैं। उनकी मानसिकता पर क्राइम हावी हो जाता है, जिसका परिणाम सामने है।
अब न तो कमेंट बॉक्स में कमेंट करने वाले लोग हत्यारोपी के स्थान पर खुद या उसके साथ में जेल जाएंगे और न ही वो लोग साथ देंगे जो ऐसे युवाओं का फायदा उठाकर, अपराध की ओर बढ़ते उनके कदमों को रोकने के बजाए, दादा बैठे हैं तू चिंता मत कर कहकर, उनका उपयोग दुरुपयोग करते रहते हैं।
युवाओं के लिए संदेश : झांकीबाजी अच्छे कामों की हो। युवाओं को यह बात समझना चाहिए कि बुरे कामों का बुरा नतीजा ही निकलता है। ऐसे तमाम उदाहरण भरे पड़े हैं जब अपराधी कोई भी रहा हो, कितना ही बड़ा रहा हो, कितना ही प्रभावशाली रहा हो, कितना ही ताकतवर रहा हो। उसकी आखिरी मंजिल जेल ही रही या फिर गैंगवार एनकाउंटर में किसी गोली से मारे गए।
पुलिस के लिए सीख : जैसे पूत के पाँव पालने में दिखाई देते हैं। वैसे हो भविष्य का अपराधी सोशल मीडिया के कंटेंट्स पर नज़र आने लगता है। कहावत है कि चलता घोड़ा दाना मांगता है। जो युवा सोशल मीडिया पर गैंग का प्रदर्शन करें, हथियार लाठी डंडे दिखाएं उनकी निगरानी और पूछताछ को जरूरी किया जाए। SP Guna MP
आमजन की जिम्मेदारी : गलत राह पर चलते युवाओं को रोकें, कम से कम उन्हें प्रोत्साहित तो न ही करें। उन्हें बताएं कि दुनिया मतलबी है, तमाशबीन है ये सिर्फ ताली बजाती है, साथ नहीं देती। शातिर लोग उपयोग करते हैं। भोगना अकेले पड़ता है इसलिए अच्छे नागरिक बनो।
बाकी जो है सो सब ठीक ही है।
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