मतदाता सूची पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: EC से पूछा—कम अंतर से जीत और छूटे वोटरों का क्या होगा?
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर अहम सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग से जवाब मांगा है। कोर्ट ने पूछा कि अगर किसी चुनाव में जीत का अंतर बहुत कम, जैसे 2% हो और बड़ी संख्या में मतदाता वोट नहीं कर पाएं, तो ऐसे हालात में क्या व्यवस्था होगी।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ इस याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसे उन लोगों ने दायर किया है जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं और जिनके मामले अभी अपीलीय न्यायाधिकरणों में लंबित हैं।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बागची ने विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में मतदाताओं को सूची से बाहर किए जाने के मामलों में एक मजबूत और प्रभावी अपीलीय तंत्र होना बेहद जरूरी है।
कोर्ट ने यह भी इंगित किया कि चुनाव आयोग ने ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ जैसी नई श्रेणी लागू की है, जो अन्य राज्यों की प्रक्रिया से अलग है। साथ ही, बिहार में पहले अपनाए गए रुख से भी बदलाव देखने को मिला है, जहां पुराने मतदाताओं को दस्तावेज अपलोड करने से छूट दी गई थी।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि यदि 10-15% मतदाता किसी कारण से वोट नहीं कर पाते और जीत का अंतर बहुत कम होता है, तो यह एक गंभीर चिंता का विषय बन जाता है, जिस पर विचार जरूरी है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालत इस मामले में अभी कोई अंतिम राय नहीं दे रही है।
इस मामले ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और मतदाताओं के अधिकारों को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है, जिस पर आने वाले समय में महत्वपूर्ण फैसले सामने आ सकते हैं।
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