ब्रिक्स सुरक्षा प्रमुखों की बैठक कल से: आतंकवाद, साइबर खतरे और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों पर होगा मंथन
नई दिल्ली। भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (एनएसए) और उच्च प्रतिनिधियों की 16वीं बैठक सोमवार से शुरू होने जा रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की अगुवाई में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में सदस्य देशों के प्रतिनिधि वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों, आतंकवाद, साइबर खतरों तथा नई तकनीकों के दुरुपयोग से पैदा हो रहे जोखिमों पर चर्चा करेंगे।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह बैठक सितंबर में प्रस्तावित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले सदस्य देशों के बीच राजनीतिक और रणनीतिक सहमति बनाने की दिशा में अहम मानी जा रही है। बैठक का मुख्य फोकस गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों पर रहेगा, जिनमें साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी का सुरक्षित उपयोग तथा उभरते तकनीकी खतरों से निपटने के उपाय शामिल हैं।
बैठक में आतंकरोधी सहयोग और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकियों के सुरक्षित उपयोग पर गठित ब्रिक्स संयुक्त कार्य समूहों की सिफारिशों और निष्कर्षों की भी समीक्षा की जाएगी। सदस्य देश सुरक्षा से जुड़े अनुभव साझा कर भविष्य की संयुक्त रणनीति पर विचार-विमर्श करेंगे।
इस बैठक की एक खास बात ईरान की भागीदारी भी होगी। ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मोहम्मद बगेर जोलगाद्र इसमें शामिल होंगे। हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते के बाद यह ईरान की पहली बड़ी अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक भागीदारी मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे पश्चिम एशिया में बदलते राजनीतिक समीकरणों और क्षेत्रीय सहयोग पर भी सकारात्मक चर्चा हो सकती है।
वहीं चीन ने भी बैठक को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने कहा कि चीनी प्रतिनिधिमंडल मौजूदा अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा परिदृश्य, वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों तथा पारंपरिक एवं गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों पर अन्य ब्रिक्स देशों के साथ विचारों का आदान-प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि चीन सितंबर में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए मजबूत राजनीतिक आधार तैयार करने और सदस्य देशों के साथ सुरक्षा सहयोग को और मजबूत बनाने का इच्छुक है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बदलते वैश्विक परिदृश्य में यह बैठक ब्रिक्स देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को नई दिशा देने और साझा चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक रणनीति तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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