ब्रिक्स से उम्मीदें: कागजी वादों से आगे बढ़कर कारोबारी हकीकत बदलने की चुनौती, छोटे निर्यातकों को राहत का इंतजार

Thursday, September 10, 2026 - 13:02
0
ब्रिक्स से उम्मीदें: कागजी वादों से आगे बढ़कर कारोबारी हकीकत बदलने की चुनौती, छोटे निर्यातकों को राहत का इंतजार

नई दिल्ली। ब्रिक्स की आगामी शिखर बैठक में वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। भारत की अध्यक्षता में इस बार संगठन के एजेंडे में एमएसएमई, व्यापार वित्त, सीमा पार भुगतान और स्टार्टअप जैसे व्यावहारिक विषयों को प्राथमिकता दी गई है। हालांकि, असली चुनौती इन घोषणाओं को जमीन पर उतारने और छोटे कारोबारियों को उनका सीधा लाभ पहुंचाने की होगी।

भारत के किसी छोटे निर्यातक के लिए ब्रिक्स की सफलता का सबसे बड़ा पैमाना यही होगा कि विदेश से मिला ऑर्डर पूरा करने के लिए उसे बैंक से कर्ज कितनी आसानी से मिल पाता है। छोटे उद्यमियों की समस्या केवल नए बाजार तलाशने तक सीमित नहीं है। कच्चा माल खरीदने, उत्पादन करने और विदेशी ग्राहक से भुगतान आने तक कारोबार चलाने के लिए पर्याप्त पूंजी की जरूरत होती है।

अगस्त में हुई ब्रिक्स व्यापार मंत्रियों की बैठक में छोटे उद्यमों के लिए जयपुर-सहमति जैसे प्रस्ताव सामने आए। यदि ब्रिक्स देश पारंपरिक गिरवी के बजाय छोटे कारोबारियों के बैंक लेनदेन और डिजिटल रिकॉर्ड को आधार बनाकर ऋण उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित करते हैं, तो इससे छोटे निर्यातकों को बड़ी राहत मिल सकती है। इसकी वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि अगले छह से 12 महीनों में कितने नए निर्यातकों को कम ब्याज पर आसानी से कर्ज मिल पाता है।

यूपीआई से आगे बढ़ने की राह

सीमा पार भुगतान भी ब्रिक्स के एजेंडे का अहम हिस्सा है। केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्राओं और तेज भुगतान प्रणालियों को आपस में जोड़ने से भारत अपनी यूपीआई व्यवस्था की सफलता को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक ले जा सकता है। इससे भारतीय कारोबारियों के लिए ब्रिक्स देशों के ग्राहकों से भुगतान हासिल करना आसान हो सकता है। हालांकि, मुद्रा विनिमय, नियामकीय अनुपालन और डेटा सुरक्षा जैसी चुनौतियों का समाधान करना भी जरूरी होगा। इस व्यवस्था की सफलता का आकलन लेनदेन की लागत, गति और पारदर्शिता के आधार पर किया जा सकता है।

भारत दवाइयों और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में अपनी विनिर्माण क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहा है। इसके लिए सुरक्षित और विविध आपूर्ति शृंखलाएं जरूरी हैं। ऐसे में ब्रिक्स के भीतर चीन की बड़ी विनिर्माण क्षमता भी एक महत्वपूर्ण पहलू है। यह देखना अहम होगा कि आपूर्ति शृंखला में सहयोग से भारत की किसी एक देश पर निर्भरता कम होती है या निर्भरता का स्वरूप ही बदल जाता है।

असली रिपोर्ट कार्ड जमीन पर दिखेगा

ब्रिक्स का एजेंडा कृषि और स्टार्टअप तक भी फैला हुआ है। इन क्षेत्रों में सहयोग तभी सार्थक माना जाएगा, जब किसानों को उनकी उपज के बेहतर बाजार और दाम मिलें तथा भारतीय स्टार्टअप्स को ब्रिक्स देशों में नए बाजारों तक पहुंच बनाने में आसानी हो।

आखिरकार ब्रिक्स की घोषणाओं का असली मूल्य सम्मेलनों और दस्तावेजों में नहीं, बल्कि कारोबारियों, किसानों और स्टार्टअप्स के रोजमर्रा के अनुभव में दिखाई देगा। छोटे निर्यातकों के लिए आसान ऋण, सस्ता और तेज सीमा पार भुगतान तथा नए बाजारों तक पहुंच यदि वास्तव में संभव होती है, तभी भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता को जमीनी सफलता माना जाएगा।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0
RNI News

Reportage News International (RNI) is India's growing news website which is an digital platform to news, ideas and content based article. Destination where you can catch latest happenings from all over the globe Enhancing the strength of journalism independent and unbiased.

Comments (0)

User