होर्मुज बना पश्चिम एशिया युद्ध का केंद्र, इस्फहान पर US-इस्राइल हमले में 15 की मौत
पश्चिम एशिया (आरएनआई) पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अब और अधिक गंभीर होता जा रहा है। अमेरिका और इस्राइल के लगातार हमलों के बीच ईरान भी जोरदार पलटवार कर रहा है और मिसाइलों व ड्रोन हमलों से पूरा क्षेत्र दहशत में है। युद्ध अब पंद्रहवें दिन में पहुंच चुका है और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास भी तनाव लगातार बढ़ रहा है, जहां जहाजों पर हमलों की खबरें सामने आ रही हैं। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कड़ा रुख और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियां वैश्विक राजनीति के लिए एक बड़े संकट का संकेत दे रही हैं। भारत सरकार ने भी कहा है कि क्षेत्र में तेजी से बदलती परिस्थितियों पर उसकी पैनी नजर बनी हुई है।
इस्राइली सेना ने दावा किया है कि तेहरान पर किए गए हवाई हमलों में ईरान की खातम अल-अनबिया आपातकालीन कमान के दो वरिष्ठ अधिकारियों को मार गिराया गया है। सेना के प्रवक्ता अविचाई अद्राई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि खुफिया शाखा से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी अब्दुल्ला जलाली-नसाब और अमीर शरियात इस हमले में मारे गए। उन्होंने कहा कि इससे पहले अमेरिका और इस्राइल के संयुक्त हमलों की शुरुआत में खुफिया इकाई के प्रमुख सालेह असादी भी मारे गए थे।
उधर लेबनान में जारी इस्राइली हमलों के कारण मानवीय संकट गहराता जा रहा है। सरकार की आपदा जोखिम प्रबंधन इकाई के अनुसार 2 मार्च से लड़ाई तेज होने के बाद अब तक 8 लाख 31 हजार से अधिक लोग अपने घर छोड़कर आंतरिक रूप से विस्थापित हो चुके हैं। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि इस्राइली हमलों में अब तक 826 लोगों की मौत हो चुकी है और 2,009 लोग घायल हुए हैं। मृतकों में 65 महिलाएं और 106 बच्चे शामिल हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार बुर्ज कलाविया में एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के मलबे से दो लापता स्वास्थ्यकर्मियों के शव मिलने के बाद मारे गए पैरामेडिक्स की संख्या बढ़कर 31 हो गई है। लगातार हमलों के कारण प्रत्यक्ष हमलों या सुरक्षा खतरों की वजह से पांच अस्पतालों को भी बंद करना पड़ा है। बचाव दल अभी भी मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं और अधिकारियों का कहना है कि मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है।
इसी बीच ईरानी मीडिया ने दावा किया है कि अमेरिका और इस्राइल द्वारा मध्य ईरान के औद्योगिक शहर इस्फहान पर किए गए हमले में कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। इस हमले के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर कालिबफ ने खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी की तीखी आलोचना की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि इस युद्ध ने यह साफ कर दिया है कि क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डे किसी की सुरक्षा नहीं करते बल्कि खुद एक खतरा बन चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका इस्राइल के लिए सब कुछ कुर्बान करने को तैयार है और उसे अन्य देशों की परवाह नहीं है।
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