साध्वी ऋतम्भरा के सेवा कार्य और ‘वात्सल्य ग्राम’ पर फिर चर्चा, समर्थकों ने बताया अनाथों व महिलाओं के लिए समर्पित जीवन
सुल्तानपुर (आरएनआई)। हिंदू आध्यात्मिक वक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता Sadhvi Ritambhara एक बार फिर चर्चा में हैं। उनके समर्थकों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन को अनाथ बच्चों, असहाय महिलाओं और समाज सेवा के लिए समर्पित किया है। इसी उद्देश्य से उन्होंने वृंदावन में ‘वात्सल्य ग्राम’ की स्थापना की, जहां अनाथ और बेसहारा बच्चों के पालन-पोषण और शिक्षा की व्यवस्था की जाती है।
साध्वी ऋतम्भरा 1990 के दशक में राम मंदिर आंदोलन के दौरान अपने भाषणों और सक्रिय भूमिका के कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आई थीं। समर्थकों का कहना है कि उस दौर में उन्होंने देशभर में भ्रमण कर हिंदू समाज को संगठित करने और धार्मिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया। उनके अनुयायियों के अनुसार उन्होंने समाज में अनाथ बच्चों के संरक्षण और सेवा को अपना प्रमुख लक्ष्य बनाया और इसी सोच के साथ वात्सल्य ग्राम परियोजना की शुरुआत की।
साध्वी ऋतम्भरा के कुछ वक्तव्यों और विचारों को लेकर समय-समय पर विवाद भी सामने आते रहे हैं। खासकर 1990 के दशक में उन्होंने कैथोलिक मिशनरी कार्यों और Mother Teresa के कामकाज पर तीखी आलोचना की थी, जिसे लेकर उस समय राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस छिड़ गई थी। उस दौर में दिए गए एक भाषण के बाद मध्य प्रदेश में उनके खिलाफ कार्रवाई भी हुई थी और कुछ समय के लिए उन्हें हिरासत में लिया गया था।
समर्थकों का कहना है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद साध्वी ऋतम्भरा ने अपने सेवा कार्यों को जारी रखा और समाज के वंचित वर्गों के लिए काम करती रहीं। उनके अनुयायी उन्हें एक आध्यात्मिक प्रेरणा और समाजसेवा के प्रतीक के रूप में देखते हैं। वहीं आलोचकों का मानना है कि उनके कुछ बयान और विचार विवादों को जन्म देते रहे हैं।
फिलहाल वृंदावन स्थित वात्सल्य ग्राम में अनाथ बच्चों, विधवा महिलाओं और जरूरतमंद परिवारों के लिए कई सामाजिक और शैक्षणिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। साध्वी ऋतम्भरा के समर्थकों का कहना है कि उनका उद्देश्य समाज में सेवा और करुणा की भावना को मजबूत करना है, ताकि बेसहारा बच्चों और महिलाओं को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन मिल सके।
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