पश्चिम एशिया में तनाव गहराया: ईरान में दसवें दिन भी इंटरनेट बंद, नए सुप्रीम लीडर पर चीन की प्रतिक्रिया
पश्चिम एशिया (आरएनआई)। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध लगातार और भयावह रूप लेता जा रहा है। Iran और Israel के बीच बढ़ते संघर्ष में United States की सैन्य कार्रवाई के बाद हालात और गंभीर हो गए हैं। मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच यह संघर्ष अब दसवें दिन में प्रवेश कर चुका है और पूरा क्षेत्र गहरे तनाव की चपेट में है। ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump का सख्त रुख और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ता सैन्य टकराव वैश्विक राजनीति के लिए बड़ा संकट बनता दिख रहा है। भारत ने भी कहा है कि तेजी से बदलती परिस्थितियों पर उसकी पैनी नजर बनी हुई है।
इसी बीच ईरान में इंटरनेट बंदी का संकट लगातार गहराता जा रहा है। साइबर सुरक्षा निगरानी संस्थाओं के अनुसार देश में इंटरनेट सेवाएं दसवें दिन भी बंद हैं और लोग करीब 216 घंटे से वैश्विक इंटरनेट से कटे हुए हैं। अनुमान है कि लगभग 9 करोड़ की आबादी इस बंदी से प्रभावित है। फिलहाल देश में इंटरनेट कनेक्टिविटी सामान्य स्तर के लगभग एक प्रतिशत पर सिमट गई है, जिससे संचार और सूचना के आदान-प्रदान पर भारी असर पड़ा है।
खाड़ी देशों में भी इस संघर्ष को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। Mohammed bin Abdulrahman Al Thani, जो Qatar के प्रधानमंत्री हैं, ने स्काई न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में ईरान के हमलों को बड़ा विश्वासघात बताया। उन्होंने कहा कि युद्ध शुरू होने के महज एक घंटे के भीतर कतर और अन्य खाड़ी देशों पर हमले किए गए, जबकि इन देशों ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वे ईरान के खिलाफ किसी भी युद्ध में हिस्सा नहीं लेंगे और कूटनीतिक समाधान की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ईरान की गलत रणनीतिक गणना ने क्षेत्र की स्थिति को और खराब कर दिया है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कतर तनाव कम करने के लिए ईरान से बातचीत जारी रखेगा।
इस बीच China ने ईरान के नए सर्वोच्च नेता के रूप में Mojtaba Khamenei की नियुक्ति पर प्रतिक्रिया दी है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Guo Jiakun ने कहा कि यह ईरान का आंतरिक मामला है और यह फैसला ईरानी संविधान के अनुसार लिया गया है। इससे पहले चीन के विदेश मंत्री Wang Yi ने ईरान की संप्रभुता का सम्मान करने की अपील करते हुए किसी भी बाहरी हस्तक्षेप के प्रयासों के खिलाफ चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि शासन परिवर्तन या तथाकथित ‘रंग क्रांति’ की कोशिशों को जनसमर्थन नहीं मिलेगा।
उधर ईरान के उप स्वास्थ्य मंत्री Ali Jafarian ने Al Jazeera को दिए साक्षात्कार में बताया कि अमेरिका और इस्राइल के हमलों में मारे गए अधिकांश लोगों की मौत विस्फोटों के कारण हुई है, जबकि घायलों में ज्यादातर को जलने और दबने की गंभीर चोटें आई हैं। उन्होंने कहा कि देश का स्वास्थ्य तंत्र मौजूदा संकट से निपटने के लिए पर्याप्त रूप से मजबूत है और सभी प्रांतों में मेडिकल विश्वविद्यालय तथा अस्पताल सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि देश की दवा कंपनियां पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं और आवश्यक दवाओं का उत्पादन जारी है।
जफरियान के अनुसार पिछले नौ दिनों में ईरान में 1,255 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 12,000 से अधिक लोग घायल हुए हैं। मृतकों की उम्र आठ महीने के शिशु से लेकर 88 वर्ष तक बताई जा रही है, जिनमें करीब 200 महिलाएं और 168 बच्चे शामिल हैं। मिनाब के एक प्राथमिक विद्यालय में बड़ी संख्या में बच्चों की मौत की खबर ने पूरे देश को झकझोर दिया है। इसके अलावा इस संघर्ष में 55 स्वास्थ्यकर्मी घायल हुए हैं और 11 की मौत हो चुकी है, जिनमें चार चिकित्सक, दो नर्स और तीन आपातकालीन सेवा के कर्मचारी शामिल हैं।
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