गुना में विकास पर सवाल: भगोरिया मेले की थिरकन के बीच आदिवासी अंचल की समस्याएं जस की तस

Friday, March 6, 2026 - 12:35
Updated: 5 months ago
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गुना में विकास पर सवाल: भगोरिया मेले की थिरकन के बीच आदिवासी अंचल की समस्याएं जस की तस

गुना। जिले में विकास के दावों के बीच प्रशासन की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े होने लगे हैं। हाल ही में आदिवासी अंचल के खेरीखता में आयोजित भगोरिया मेले में जिला प्रशासन की सक्रिय मौजूदगी और उत्सव में सहभागिता चर्चा का विषय बनी हुई है। जिला कलेक्टर किशोर कन्याल, पुलिस अधीक्षक अंकित सोनी, डीएफओ अक्षय राठौर और जिला पंचायत सीईओ अभिषेक दुबे सहित प्रशासनिक अमला मेले में शामिल हुआ और पारंपरिक कार्यक्रमों का आनंद लिया। हालांकि इस दौरान आदिवासी क्षेत्र की मूलभूत समस्याएं और विकास कार्यों में आ रही बाधाएं फिर चर्चा में आ गईं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि खेरीखता के पास स्थित प्रसिद्ध धार्मिक स्थल केदारनाथ मंदिर पिछले तीन वर्षों से बंद है। मंदिर परिसर की एक चट्टान में दरार आने के कारण यहां शिवरात्रि जैसे महत्वपूर्ण पर्व पर भी भगवान शिव का अभिषेक नहीं हो पा रहा है। क्षेत्रीय लोगों का मानना है कि यदि जिला प्रशासन और वन विभाग मिलकर प्रयास करें तो इस धार्मिक स्थल को फिर से खोला जा सकता है।

इसी क्षेत्र में केंद्र सरकार की आदि आदर्श ग्राम योजना के तहत बनने वाले कई आंगनबाड़ी भवन अधूरे पड़े हैं और स्कूलों की बाउंड्रीवाल का निर्माण भी शुरू नहीं हो पाया है। इसकी वजह वन भूमि पर निर्माण की अनुमति का लंबित होना बताया जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से यह समस्या जस की तस बनी हुई है, जिससे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

खेरीखता के पास स्थित टांडा गांव की स्थिति भी चिंताजनक बताई जा रही है। करीब एक हजार की आबादी वाले इस गांव में आज भी लोगों को गड्ढों से पानी निकालकर पीना पड़ता है। गांव तक पहुंचने के लिए ठीक रास्ता नहीं है और मोबाइल नेटवर्क भी नहीं पहुंच पाया है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में कई सड़कों और भवनों के शिलान्यास तो हुए, लेकिन अधिकांश परियोजनाओं का काम शुरू नहीं हो सका।

इस बीच जिले में कृषि के क्षेत्र में भी नई पहचान बनाने की कोशिश की जा रही है। कलेक्टर किशोर कन्याल के अनुसार गुना में गुलाब की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है और यहां पैदा होने वाले गुलाब की मांग भोपाल और दिल्ली तक पहुंच रही है। इसके लिए पॉलीहाउस निर्माण पर लाखों रुपये का अनुदान भी दिया गया है। हालांकि स्थानीय लोग यह भी कहते हैं कि इस योजना का लाभ मुख्य रूप से संपन्न किसानों तक ही सीमित दिखाई देता है।

ग्रामीणों का मानना है कि यदि प्रशासन आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं—जैसे पेयजल, सड़क, शिक्षा और संचार नेटवर्क—पर प्राथमिकता से ध्यान दे तो क्षेत्र के लोगों को वास्तविक विकास का लाभ मिल सकता है। फिलहाल प्रशासनिक गतिविधियां और आगामी कार्यक्रमों की तैयारियां जारी हैं, जबकि आदिवासी अंचल के कई मुद्दे समाधान की प्रतीक्षा में हैं।

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