कुरनिया माता मंदिर में कमिटी गठन को दौरान हल्ला हंगामा,सीओ एवं थानाध्यक्ष लौटे बैरंग

Thursday, July 4, 2024 - 18:02
Updated: 2 years ago
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कुरनिया माता मंदिर में कमिटी गठन को दौरान हल्ला हंगामा,सीओ एवं थानाध्यक्ष लौटे बैरंग

घोड़ासहन (मोतिहारी) (आरएनआई) भारत नेपाल सीमावर्ती क्षेत्र में सिद्धिपीठ के रूप में माने जाने वाले कुरनिया मंदिर राजनीतिक अखाड़ा का रूप लेते जा रहा है। मंदिर में कमिटी गठन को लेकर विवाद और गहराता दिख रहा है। गुरुवार को मंदिर परिसर में स्थानीय सीओ और थानाध्यक्ष के देख रेख में कमिटी गठन को लेकर बैठक आयोजित की गयी है। लेकिन कमिटी चयन के दौरान ही एक पक्ष से महिला एवं पुरुष उग्र हो गये। जिनका आरोप था। अपने खास खास लोगो को कमिटी में शामिल किया गया है। जिससे सभी उग्र हो कर हल्ला हंगामा करने लगे। तथा स्थानीय प्रसाशन के सामने जमकर बवाल काटा। बीचबचाव के बाद मामला शांत हुआ। अंचलाधिकारी आनंद कुमार ने बताया कि प्रशासनिक देख रेख में मंदिर परिसर में विधि व्यवस्था संधारण,सुरक्षा व्यवस्था, ट्रैफिक नियंत्रण सहित आर्थिक मामले को लेकर कमिटी गठन की बैठक आयोजित की गयी है। लेकिन लोगो के हल्ला हंगमा के कारण उक्त बैठक को रद्द कर दिया है। नया बैठक की तारीख सोलह जुलाई को निर्धारित किया गया है। जो घोड़ासहन थाना परिसर में आयोजित किया जाएगा।

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Comments (1)

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Tarkesh kumar
Tarkesh kumar 2 years ago
मंदिर में राजनीतिक मकसद के लिए नहीं बल्कि माथा टेकने के लिए आया जाता है। मेरा कहना है की मन्दिर को राजनीति का अखाड़ा न बनाए। मन्दिर समाज को जोड़ने के लिए होता है न कि लोगों के हाथ तोड़ने के लिए। मन्दिर में लोग आस्था और श्रद्धा के साथ समाज व परिवार की भलाई की कामना करते है। किसी भी धार्मिक जगह का अपना एक महत्व होता है और हम सब की जिम्मेदारी बनती है कि हम उसे बना कर रखे। नेता धार्मिक स्थलों पर अपनी राजनीति न करें, इसी में समाज व भाईचारे की भलाई है। कुछ नेताओं ने तो मंदिर के लोगों के बीच भाईचारा खराब करने के लिए राजनीति का अखाड़ा बना दिया। राजनीति जन सेवा के लिए होती है ना की लोगों के बीच आपसी मतभेद बढ़ाने के लिए जय कुरनिया माता