सुप्रीम कोर्ट ने बीसीआई के अधिकारों पर उठाए सवाल, लॉ कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के नियमन की होगी जांच
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने लॉ कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के नियमन में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि अदालत इस बात की जांच करेगी कि क्या बीसीआई के पास कानून कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को नियंत्रित व विनियमित करने का अधिकार है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सवाल किया कि कानूनी शिक्षा के नियमन के लिए बीसीआई को विशेषज्ञ संस्था किस आधार पर माना जा सकता है। पीठ ने कहा कि शैक्षणिक मामलों से जुड़े विषयों के लिए कानून के विद्वान और शिक्षाविद अधिक उपयुक्त हो सकते हैं।
सीजेआई सूर्यकांत ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि बीसीआई की वैधानिक भूमिका तब शुरू होती है, जब किसी व्यक्ति को कानून की प्रैक्टिस के लिए लाइसेंस दिया जाता है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या बीसीआई को कानून स्कूलों और विश्वविद्यालयों को नियंत्रित करने की शक्ति हासिल है।
पीठ ने यह भी कहा कि बीसीआई सामान्य दिशानिर्देश तय कर सकता है, जैसे कानून की पढ़ाई की अवधि चार या पांच वर्ष होना, लेकिन शैक्षणिक संस्थानों के नियमन और नियंत्रण के अधिकार की अलग से जांच जरूरी है।
मामला बीसीआई-पीईएआरएल फर्स्ट ट्रस्ट के कामकाज और ट्रस्ट की ओर से कानून कॉलेज स्थापित किए जाने से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई के दौरान सामने आया। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं पर नोटिस जारी करते हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया से दो सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।
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