पन्ना में कथित अवैध रेत उत्खनन और रॉयल्टी चोरी का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, PIL को चंबल मामले से किया क्लब
पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में वर्ष 2020 से बिना टेंडर कथित तौर पर हो रहे रेत उत्खनन और हजारों करोड़ रुपये की रॉयल्टी चोरी के आरोपों से जुड़ी जनहित याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। याचिका में केन नदी से कथित अवैध रेत उत्खनन और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
कांग्रेस नेता भरत मिलन पांडे की ओर से दायर PIL में आरोप लगाया गया है कि पन्ना में वर्ष 2020 के बाद रेत उत्खनन के लिए कोई टेंडर नहीं हुआ। इसके बावजूद बड़ी मशीनों के जरिए केन नदी से लगातार रेत निकाले जाने का आरोप लगाया गया है। याचिका में दावा किया गया है कि इससे पिछले छह वर्षों में सरकार को हजारों करोड़ रुपये की रॉयल्टी का नुकसान हुआ और नदी एवं पर्यावरण को भी भारी क्षति पहुंची।
याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि उनके द्वारा इस मामले को सार्वजनिक किए जाने के बाद उनके खिलाफ कई मामले दर्ज किए गए और उन्हें जेल भी जाना पड़ा। याचिका के अनुसार, एक एससी/एसटी मामले में आरोपी बनाए जाने के बाद उन्हें करीब 18 दिनों तक जेल में रखा गया।
बताया गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में चंबल नदी में कथित अवैध उत्खनन के मामले में स्वतः संज्ञान लिया था। अब पन्ना में अवैध रेत उत्खनन से जुड़ी इस PIL को भी उसी मामले के साथ क्लब करने का आदेश दिया गया है।
मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होने वाली सुनवाई और संबंधित पक्षों के जवाब के बाद ही स्पष्ट होगी।
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